बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर का आक्सीजन कांड : सात महीने बाद जेल में बंद डाक्टरों की हिमायत में उतरा आईएमए, रिहाई की मांग उठाई

जनमत

-आईएमए ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल, रुख स्पष्ट करने को कहा
-बीआरडी मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत का मामला
-डा. कफील खान की पत्नी डा. शबिस्ता ने शौहर को बेगुनाह बताया

फरहान अहमद

गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन की कमी से हुई बच्चों की मौत के मामले में जेल में बंद डाक्टरों के हिमायत में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने आखिरकार सात महीने बाद चुप्पी तोड़ी. सोमवार को प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर एसोसिएशन के जिम्मेदारों ने डाक्टरों के खिलाफ हुई कार्यवाई पर असंतोष जाहिर करते हुए जेल में बंद सीनियर डाक्टरों की सेहत पर चिंता व्यक्त की साथ ही आगाह किया कि अगर किसी तरह की अनहोनी होती है तो आईएमए प्रदेशभर में आंदोलन पर मजबूर होगा.

आईएमए के सचिव डा. आर.पी. शुक्ला ने कहा कि अगस्त माह के ‘कथित ऑक्सीजन कांड’ में हमारे तीन साथी डाक्टरों डा. राजीव मिश्रा, डा. सतीश कुमार एवं डा. कफील खान को गिरफ्तार कर गंभीर धाराएं लगाकर जेल में डाल दिया गया. इसे एक सामान्य प्रक्रिया मानकर हममें से किसी ने भी इसका विरोध नहीं किया, परंतु उनकी जेल में प्रताड़ना, उनकी जमानत न होने देना एवं इलाज में लापरवाही से उनके प्राण संकट में डालने से किसी बड़ी साजिश की बू आ रही है.

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उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश सरकार का स्पष्ट मानना है कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई है तो गंभीर आरोपों में निरूद्ध डाक्टरों को बलि का बकरा क्यों बनाया जा रहा है ? एक तरफ ऑक्सीजन की कमी को मौत का कारण न मानने, दूसरी तरफ डाक्टरों पर सख्त से सख्त कार्यावाई करने से समाज में सरकार की मंशा पर संदेह उत्पन्न हो रहा है. उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन की कमी एक लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक उदासीनता या असंवेदनशीलता या संभावित भ्रष्टाचार के कारण हुई. इसके लिए लखनऊ से लेकर गोरखपुर तक के सभी अधिकारी दोषी हैं जिनके पास समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त समय एवं अधिकार थे परंतु संभवत: उन्हें बचाने के लिए सीमित अधिकार के साथ व्यवस्था की मात्र देखभाल करने वाले डाक्टरों को इसके लिए दोषी बताकर जेल में डाल दिया गया.

आईएमए के अध्यक्ष डा. जेपी जायसवाल ने कहा कि विगत आठ माह में इस समस्या की जड़ तक जाने के लिए कोई भी प्रयास नहीं किया गया है जिस कारण भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को नहीं रोका जा सकेगा. उन्होंने मीडिया से जनता के सामने सच लाने का आह्वान किया ताकि सरकार पूरे प्रकरण की गंभीरता एवं स्पष्टता से जांच करने को मजबूर हो और शासन में बैठे एवं प्रभावशाली दोषियों को पहचान कर उन्हें दंडित किया जा सके.
प्रेस वार्ता में डा. सीएम तिवारी, डा. निखिल चौधरी, डा. डीआर खन्ना व डा. कफील खान की पत्नी डा. शबिस्ता खान मां नुजहत परवीन के अलावा डॉ राजीव मिश्र और डॉ सतीश कुमार के परिजन भी मौजूद रहे।

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आईएमए की मुख्यमंत्री से 6 सवाल  और 5 मांग

सवाल

1. अगस्त माह में हुई बच्चों की मौत स्वाभाविक थी या ऑक्सीजन की कमी से हुई।

2. यदि बच्चों की मृत्यु स्वाभाविक थी तो, ख्याति प्राप्त डाक्टरों को गंभीर आरोपों में निरूद्ध करके उन्हें अपमानित व मानसिक रूप से प्रताड़ित क्यों किया जा रहा है ?

3. विगत आठ माह में कोई गंभीर जांच बैठा कर तथ्यों को सामने लाने की कोशिश क्यों नहीं की गई ?
ऑक्सीजन की सप्लाई एवं भुगतान का निर्णय लखनऊ में बैठे मंत्री एवं अधिकारी करते हैं, तो इससे अत्यधिक विलंब के लिए उन पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गई ?

4. गैस सप्लायर द्वारा बार-बार चेतावनी देने तथा प्रधानाचार्य के बार-बार अनुरोध के बाद भी जिलाधिकारी से लेकर लखनऊ सचिवालय तक लोगों ने चुप्पी क्यों साधे रखी ?

5. दोषी डाक्टरों का कोई पूर्व इतिहास न होने, कोई गंभीर अपराध में लिप्त होने की पुष्टि सरकार द्वारा होने के बाद भी, इतने लंबे समय तक उनको जमानत तक से वंचित क्यूं रखा जा रहा है, जबकि वो पद से हटाये जा चुके हैं, और किसी भी प्रकार से कानूनी प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करने की स्थिति में नहीं हैं।

6. गंभीर जाँच कर तथ्यों को सामने लाने की कोशिश क्यों नहीं की गई

मांग

1-डाक्टरों को अकारण लंबे समय तक जेल में रखने से उनके स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान हुआ है. जेल के अधिकारियों पर डाक्टरों की सेहत का समुचित ध्यान न रखने के लिए उन पर कार्यवाई की जाए.

2. सभी डाक्टरों का विशेषज्ञ डाक्टरों की देखरेख में समुचित इलाज की व्यवस्था की जाए तथा उन्हें जबरदस्ती वापस जेल भेजने का दबाव न बनाया जाय. डाक्टरों की सेहत एवं जीवन के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश न की जाए.
3. सभी डाक्टरों को जल्द से  जल्द जमानत पर रिहा किया जाए.

4. प्रदेश से बाहर की एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन कर पूरे प्रकरण की, निश्चित समय सीमा में, पूर्ण निष्पक्षता से जांच करायी जाए ताकि वास्तविक अपराधियों को चिंह्रित करके, निर्दोषों को अनावश्यक प्रताड़ना से बचाया जा सके.

5. पूरे प्रकरण में निर्दोषों को बलि का बकरा बनाने की वजह से भविष्य में सरकारी अस्पतालों के डाक्टरो एवं आक्सीजन आदि के सप्लायरों का अकाल पड़ने की संभावना है। जिसके कारण प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है।

मेरे शौहर निर्दोष – डा. शबिस्ता खान

प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता के दौरान डा. कफील खान की पत्नी डा. शबिस्ता खान व मां नुजहत परवीन ने डा. कफील को बेगुनाह बताया। डा. शबिस्ता पहली बार मीडिया के सामने रुबरु थीं।

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उन्होंने कहा कि मेरे शौहर ने बच्चों को बचाने की हर मुमकिन कोशिश की। ऑक्सीजन खत्म हो जाने के बाद बच्चों को बचाने की जद्दोजहद मेरे शौहर ने की। जहां-जहां से मुमकिन था वहां-वहां से वह आक्सीजन सिलेंडर लाएं और उन्हें ही बच्चें की मौत का जिम्मेदार बना दिया गया। मैं दो बार मुख्यमंत्री से शौहर के लिए फरियाद कर चुकी हूं। डा. शबिस्ता ने पूरे प्रकरण के लिए प्रशासन को जिम्मेदार माना।  डा. कफील की मां नुजहत परवीन ने कहा कि बस मेरा बेगुनाह बेटा वापस आ जाए। मुख्यमंत्री तक फरियाद लगा चुकी हूं।

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