साहित्य-संस्कृति न्याय के सवाल को छोड़कर सामाजिक सौहार्द की बात ही नहीं हो सकती : प्रो राजीव भार्गवसुधीर सुमनNovember 19, 2018November 28, 2018 by सुधीर सुमनNovember 19, 2018November 28, 201803480 नई दिल्ली. ‘‘ जिस समाज में किसी एक समूह या समुदाय का वर्चस्व हो, जहां हिंसा, दमन-उत्पीड़न और शोषण हो, जहां असहिष्णुता हर नुक्कड़ पर...