समकालीन जनमत

Tag : गाडाटोला

कविता

प्रेम और प्रकृति को भाषा में बचाने की कोशिश करता एक कवि

समकालीन जनमत
प्रज्ञा गुप्ता ” जिंदगी में कुछ ‘बनने’ की चाहत में पहाड़ पीछे छूटते गए नदियों को गाड़ी की खिड़की से जी भर के देख पाता...
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