Tag : मजाज़

शख्सियत साहित्य-संस्कृति

अभी चलता हूँ ज़रा ख़ुद को सँभालूँ तो चलूँ: असरार-उल-हक़ ‘मजाज़’ को याद करते हुए

विष्णु प्रभाकर
(19 अक्टूबर 1911 – 5 दिसम्बर 1955) साल 1911। इसी साल दो बच्चे पैदा हुए, आगे चलकर जिन्होंने अपनी शायरी से उर्दू अदब में खूब...
पुस्तक

लखनऊ की पांच रातें : अली सरदार जाफरी 

समकालीन जनमत
गीतेश सिंह कोई सरदार कब था इससे पहले तेरी महफ़िल में बहुत अहले सुखन उट्ठे, बहुत अहले -कलाम आए । “मुझे इंसानी हाथ बड़े खूबसूरत...

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