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यूजीसी इक्विटी गाइडलाइंस के समर्थन में लखनऊ विश्वविद्यालय में जोरदार प्रदर्शन

लखनऊ। यूजीसी इक्विटी गाइडलाइंस 2026 के समर्थन में आज लखनऊ विश्वविद्यालय के न्यू कैंपस में बड़ी संख्या में छात्र&छात्राओं ने प्रदर्शन किया।  यह प्रदर्शन उच्च शिक्षा में समानता, प्रतिनिधित्व और जवाबदेही की मांग को लेकर छात्रों की बढ़ती एकजुटता को दर्शाता है।

इस प्रदर्शन में आइसा, एनएसयूआई, एससीएस और बीएएसएफ ने एकजुट होकर समर्थन दिया। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित था। इसके बावजूद परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा। प्रदर्शन से पहले एहतियाती नोटिस भी जारी किए गए, जो यह साफ दिखाते हैं कि प्रशासन और पुलिस समानता और न्याय की मांग कर रहे छात्रों को डराने की कोशिश कर रहे हैं।

छात्र संगठनों ने इस चयनात्मक डराने की नीति की कड़ी निंदा की है। एक ओर जहां इक्विटी और संवैधानिक अधिकारों की बात करने वाले छात्रों पर निगरानी, नोटिस और दबाव बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यूजीसी इक्विटी गाइडलाइंस का विरोध करने वाले जातिवादी और मनुवादी विचारों को बढ़ावा देने वाले समूहों को बिना रोक-टोक प्रदर्शन करने दिया गया, कई जगहों पर पुलिस सुरक्षा में। अगर प्रशासन को सच में कानून-व्यवस्था की चिंता होती, तो यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस के खिलाफ हुए प्रदर्शन पुलिस संरक्षण में क्यों होते?

प्रदर्शन कर रहे छात्रों की केंद्रीय मांग बिल्कुल स्पष्ट है। यूजीसी इक्विटी गाइडलाइंस 2026 को रोहित एक्ट के साथ लागू किया जाए, ताकि विश्वविद्यालयों में वंचित और हाशिए पर पड़े छात्रों के लिए जवाबदेही और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

आइसा उत्तर प्रदेश के संयुक्त सचिव हर्षवर्धन ने कहा कि भारी पुलिस तैनाती और पहले से दिए गए नोटिस यह दिखाते हैं कि प्रशासन समानता और न्याय की बात से असहज है। यूजीसी इक्विटी गाइडलाइंस का समर्थन करना कोई अपराध नहीं है। असली समस्या यह है कि ये गाइडलाइंस विश्वविद्यालयों में जमी हुई जातिगत असमानताओं को चुनौती देती हैं।”

एनएसयूआई उत्तर प्रदेश के महासचिव शुभम खरवार ने कहा कि छात्र बराबरी और न्यायपूर्ण शिक्षा की मांग कर रहे हैं। इन मांगों पर बात करने के बजाय प्रशासन डर और पुलिसिया दबाव के जरिए छात्रों को चुप कराना चाहता है। यह चयनात्मक रवैया प्रशासन के पक्षपात को उजागर करता है।

 एससीएस लखनऊ विश्वविद्यालय न्यू कैंपस के अध्यक्ष नवीन यादव ने कहा कि न्यू कैंपस में हुआ प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था। इतनी भारी पुलिस मौजूदगी की कोई जरूरत नहीं थी। प्रशासन को छात्रों को कानून-व्यवस्था की समस्या मानना बंद करना चाहिए और उनकी जायज मांगों पर संवाद करना चाहिए।

बीएएसएफ के वरुण आज़ाद ने कहा कि जब छात्र इक्विटी और रोहित एक्ट की मांग करते हैं, तो उन्हें डराया जाता है। वहीं जातिवादी और मनुवादी सोच को संरक्षण दिया जाता है। इससे साफ हो जाता है कि व्यवस्था किसके साथ खड़ी है।

छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया कि डराने की नीति से समानता की लड़ाई कमजोर नहीं होगी। जब तक यूजीसी इक्विटी गाइडलाइंस 2026 को रोहित एक्ट के साथ लागू नहीं किया जाता और विश्वविद्यालय सभी के लिए गरिमा, न्याय और समान अवसर के स्थान नहीं बनते, तब तक छात्र संगठित होकर संघर्ष करते रहेंगे।

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