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उन्नाव रेप पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए लखनऊ में विरोध मार्च, जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

लखनऊ। उन्नाव बलात्कार कांड में दोषी कुलदीप सिंह सेंगर को मिली ज़मानत के विरोध में 29 दिसम्बर को लखनऊ में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (एपवा), जन संस्कृति मंच (जसम), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और इंक़िलाबी नौजवान सभा (इंनौस) के संयुक्त आह्वान पर जोरदार विरोध मार्च निकाला गया। प्रदर्शनकारी परिवर्तन चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च करते हुए पहुँचे और राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।

मार्च के दौरान “ बलात्कारी को बेल नहीं, जेल दो ”, “ उन्नाव रेप पीड़िता को न्याय दो ” और “ न्याय चाहिए—अभी चाहिए ” जैसे नारे गूंजते रहे। वक्ताओं ने कहा कि बलात्कारियों को ज़मानत मिलना और पीड़िताओं को न्याय के लिए वर्षों तक संघर्ष करना, न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

एपवा की उत्तर प्रदेश राज्य अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी ने कहा कि  जब सत्ता, पुलिस और न्याय व्यवस्था मिलकर अपराधियों को संरक्षण देती है, तब महिलाओं की सुरक्षा खोखला दावा बन जाती है। उन्नाव की पीड़िता के साथ हुआ अन्याय पूरे समाज के लिए चेतावनी है। हम ज़मानत की इस संस्कृति को स्वीकार नहीं करेंगे।

एपवा, लखनऊ की संयोजक सरोजिनी बिष्ट ने कहा ने कहा कि “पीड़िता और उसके परिवार को लगातार धमकियाँ, अपमान और संस्थागत उपेक्षा झेलनी पड़ी है। यह लड़ाई सिर्फ़ एक मामले की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ़ है जो पीड़िताओं को चुप कराने पर आमादा रहती है।”

जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कौशल किशोर ने कहा कि यह केवल कानूनी नहीं, सांस्कृतिक संकट भी है—जहाँ अपराधियों का महिमामंडन और पीड़िताओं की चुप्पी सामान्य की जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ता को बिना वज़ह जेलों में बंद किया जा रहा है। इस संस्कृति के खिलाफ़ जनपक्षीय, प्रगतिशील ताक़तों को एकजुट होकर लड़ना होगा। सड़क पर आना होगा।

आइसा के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव शिवम सफ़ीर ने कहा कि जब बलात्कारियों को राजनीतिक संरक्षण मिलता है, तब युवाओं की चुप्पी भी अपराध बन जाती है। छात्र और युवा इस अन्याय के खिलाफ़ सड़कों पर उतरेंगे और न्याय सुनिश्चित होने तक संघर्ष जारी रखेंगे।

इंकलाबी नौजवान सभा उत्तर प्रदेश के संयुक्त सचिव राजीव गुप्ता ने कहा कि कानून का उद्देश्य कमज़ोरों की रक्षा है, न कि ताक़तवर अपराधियों को राहत देना। ज़मानत के ऐसे फ़ैसले आम जनता के भरोसे को तोड़ते हैं और अपराधियों का मनोबल बढ़ाते हैं।

संयुक्त संगठनों ने मांग की कि कुलदीप सिंह सेंगर की ज़मानत तत्काल रद्द की जाए, पीड़िता को पूर्ण न्याय और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, तथा ऐसे सभी मामलों में राजनीतिक संरक्षण समाप्त किया जाए। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।

 प्रदर्शन में जसम लखनऊ के अध्यक्ष धर्मेन्द्र कुमार, सचिव फरजाना महदी व सुचित माथुर, आइसा के शांतम निधि व हर्षवर्धन तथा एपवा नेता कमला गौतम समेत अच्छी संख्या में महिलाएं और छात्र-छात्राएं व नौजवान शामिल हुए।

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