बाल विकास विद्यालय (रूगडी़बोर) बरकाकाना (घुटूवा गांव) में 31 अगस्त को झारखंड जन संस्कृति मंच की ओर से करमा महोत्सव की पूर्व संध्या पर गहदम झुमइर का आयोजन किया गया।
इस दौरान करम पर्व के पारंपरिक लोकगीतों पर पारंपारिक वाद्ययंत्रों- मांदल, ढोल-नगाड़ा की धुन पर देर शाम तक पुरूषों और महिलाओं द्वारा सामूहिक झुमइर नृत्य की प्रस्तुति होते रही। यह पहला मौका था जब झारखंड जन संस्कृति मंच के आयोजन में गांव के लोगों ने रिकार्डिंग और डीजे जैसे कानफाड़ू संस्कृति के बरखिलाफ अपने पारंपरिक व शिष्ट लोकगीतों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों से अपना स्वर देकर अखडा संस्कृति को जीवंत कर दिया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन सुरेन्द्र कुमार बेदिया और शिवनारायण बेदिया ने किया।

मुख्य अतिथि आदिवासी संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय सह संयोजक देवकीनन्दन बेदिया और अन्य अतिथियों ने फीता काट कर और करम पेड़ में मिट्टी का दीपक प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड में करम महोत्सव आदिवासी मूलवासी की सांस्कृतिक पहचान है। आज झारखंडी पर्व त्यौहार, भाषा, संस्कृति को बचाने और इसके उत्थान के लिए ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम करना जरुरी है।
जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य सुरेन्द्र कुमार बेदिया ने कहा कि करम पर्व केवल आदिवासी समाज का त्यौहार नही है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए संदेश देता है कि हमारे असली शक्ति धन दौलत में नहीं बल्कि प्रकृति के गोद में रहना और आपस में मिलकर चलना है। अगर इस संदेश को जीवन में उतार लें तो समाज और प्रकृति दोनों ही समृद्ध और सुरक्षित रहेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि आज डीजे की संस्कृति ने नई युवा पीढ़ी को अपनी मूल आदिवासी लोक संस्कृति से अलग थलग कर रही। आज हमारे पुरखों से प्राप्त पारंपरिक लोकगीतों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों- ढोल नगाडा और मांदल को सहेज के रखना और बचाना बहुत जरूरी हो गया है।
झारखंड जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय पार्षद और जाने-माने लोक गायक भरत बेदिया और दिनेश करमाली के ग्रुप ने खोरठा करम गीतों -“सावन कर मास आइल सभे खेत चास भेल, एहे भाई रोपी उठली सभे खेत हो।”, ” कथिखने बोलय हो पीपहीं चेरंया भगजोगनी, ” गुईया रे कथिखने बोले भेंगराज ” की प्रस्तुति ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में खूब समां बांधा। ” वहीं होन्हे टांड के मनसा बेदिया घुटूवा और डुडगी गांव के टीमों द्वारा गाये करम गीतों से युवक, युवतियां, महिलाएं, बच्चे, बुढ़े सभी थिरकने पर विवश हो गये । करमा झुमइर लोकगीतों के श्रृंखला से माहौल देर शाम तक उल्लासपूर्ण बना रहा।

अतिथि भी खोरठा गीतों पर थिरकते नजर आए। नृत्य में विभिन्न समूहों ने भाग लिया। बेहतर प्रदर्शन करनेवले प्रतिभागियों को आदिवासी साड़ी और गमछा देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम स्थल में सैंकड़ों लोगों ने अंटरी-बंटरी( चना ) और खिचड़ी खाकर करम झुमइर पर काफी लुत्फ उठाया।
झारखंड सस्कृति मंच के कलाकार और आयोजन समिति के दिनेश करमाली, मोतीलाल बेदिया, कृष्णा बेदिया, अजित बेदिया और अमित बेदिया का खासा योगदान रहा। मोतीलाल द्वारा आदिवासी संस्कृति पर शानदार पोस्टर प्रदर्शनी भी लगाई गई।

मौके पर पूर्व जिला परिषद सुरपति देवी, डीएसपी प्रशांत बेदिया की मां कविता देवी, संजय बेदिया, दिलीप बेदिया, चतुर्गुण बेदिया, सहदेव बेदिया, सुगन कुमारी, सुभाष बेदिया, हेमंती देवी, किरण कुमारी, रीमा देवी, सुजाता कुमारी, रामदेव बदिया, बोधन बेदिया , छेदन बेदिया, सुमेश मांझी बेदिया, प्रीति जी बेदिया, वार्ड पार्षद 21 के मुखिया गीता देवी, बृज नारायण मुण्डा, अनिता देवी, नागेश्वर मुंडा, रंजना देवी, विकी बेदिया,धनमती देवी, मालती देवी मौजूद थे। कार्यक्रम में सैंकड़ों की संख्या में बच्चे, युवक युवतियां, महिलाएं, बुजुर्ग शामिल थे।

