सुपौल (बिहार)। ‘ कोशी की विद्यमान चुनौती और हमारा दायित्व ‘ विषय पर कोशी नवनिर्माण मंच का जिला कार्यकर्ता सम्मेलन 11 सितंबर को शहर के पब्लिक लाइब्रेरी में आयोजित किया गया।
सम्मेलन में नदी और पानी पार करते हुए सुबह हुई वर्षा के बावजूद दो दर्जन से अधिक गांवों के ढाई सौ कार्यकर्ता शमिल हुए। सभी ने कोशी के सवालों पर सरकार और प्रशासन की उपेक्षा लगाया। जिला प्रशासन को सभी कटाव पीड़ितों को पुनर्वास और सरकारी जमीन में बसाने का अल्टीमेटम देते हुए कहा गया कि यदि मांग नहीं मानी गई तो घर का ठाट, माल मवेशी और कटाव पीड़ितों के परिवार के सभी लोगों के साथ डेरा डालो सत्याग्रह समाहरणालय के समक्ष शुरू होगा। यदि बल प्रयोग सरकार करेगी तो पूरे कोशी के लोग कोशी महासेतु जाम करने और उसके बाद वोट बहिष्कार का विकल्प खुला रखे हैं। कोशी तटबंध पर बसे लोगों को उजाड़ने के बजाय बसाने, सर्वे कर कोशी के भीतर के लोगों को पुनर्वासित कराने, कोशी पीड़ित विकास प्राधिकार को लागू कराने, कोशी की छाड़न धाराओं को पुनः सक्रिय कर नियंत्रित तरीके से कोशी का पानी डायवर्ट करते हुए जनपक्षीय समाधान की मांग को लेकर जल सत्याग्रह किया जाएगा। चार हेक्टेयर के लगान की माफी के बाद वसूली के सवाल पर प्रशासन के ऊपर मुकदमा संगठन हाईकोर्ट में करेगा।
जिला कार्यकर्ता सम्मेलन की शुरुआत राजेश मंडल के स्वागत भाषण के साथ हुआ। इसके बाद आलोक राय ने सम्मेलन का आधार पत्र प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए गंगा मुक्ति आंदोलन के उदय ने कहा कि नदियों को जब भी बांधा गया है वहां विस्थापन की समस्या हीआई है। विस्थापन से सिर्फ परिवार ही नहीं उजड़ते है , संस्कृति भी बिखर जाती है। फरक्का बराज बनने से गंगा और इसकी सहायक कोशी पर असर हो रहा है। विकास के नाम पर विनाशक कार्यक्रमों पर पुनर्विचार करना होगा। कोशी पीड़ितों की बातों को सरकार को सुनना चाहिए। यदि सरकार बात नहीं सुनती है तो संगठित होकर जोरदार शांतिपूर्ण आंदोलन ही रास्ता बनता है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए अवकाश प्राप्त मुख्य अभियंता भुवनेश्वर झा ने कोशी के विस्थापितों और पीड़ितों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की।

कटाव पीड़ितों में बेला गोठ के भादो बिंद, इंदिरा देवी, लालगंज के युगेश्वर मिस्त्री, सुपौल प्रखंड के डुमरिया गांव से प्रमिला देवी, बेला गोठ से जितेन्द्र, उमेश पासवान, फूलकुमारी देवी, त्रिफुल देवी, प्रियंका, अरविंद यादव, महेंद्र चौधरी, बौराहा से रजनीकांत सहित कई लोगों ने अपनी बात कही।
सम्मेलन की अध्यक्षता आलोक राय, मो अब्बास, राजेंद्र यादव, अरविंद मेहता, राजेश मंडल, राम कुमार राय और प्रमिला देवी ने संयुक्त रूप से किया। संचालन इंद्र नारायण सिंह ने किया।
संगठन के सांगठनिक सत्र में सांगठनिक मजबूती का प्रस्ताव रामचंद्र यादव ने रखा। उसके बाद चुनाव में तदर्थ कमिटी का सभी ने एक स्वर में अनुमोदन करते हुए आगे के दो साल के लिए चुनाव किया। पांच प्रखंड अध्यक्षों का चुनाव किया गया जिसमें सुपौल के प्रखंड अध्यक्ष हरिनंदन, किशनपुर के फूलदेव मुखिया और सचिव उमेश पासवान, मरौना की प्रखंड अध्यक्ष समतोलिया देवी और सचिव सुभाष यादव को चुना गया। सरायगढ़ के प्रखंड अध्यक्ष छुतहरु पासवान, सचिव धनेश्वर मुखिया को चुना गया निर्मली में अशोक मेहता को अध्यक्ष चुना गया।
सांगठनिक सत्र की अध्यक्षता प्रीतम मुखिया, सिंघेश्वर राय, कमलावती देवी, रामचंद्र, चंद्र मोहन यादव ने संयुक्त रूप से किया। संचालन महेन्द्र यादव ने किया। धन्यवाद ज्ञापन धर्मेन्द्र ने किया। व्यवस्था में शिवशंकर मंडल, संजय, अरुण, लखन मुखिया, प्रियंका, भोला, अनिल, संतोष मुखिया, भीम सदा, सतीश सुमन, आरिफ निजाम, राजो सदा इत्यादि लोग थे।

