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मिर्जापुर के सरकारी अस्पताल में लापरवाही से गर्भवती महिला की मौत, आन्दोलन करने पर 20 पर केस

स्वास्थ्य केंद्रों के अंदर अप्रशिक्षित एनम कर रही हैं गर्भवती महिलाओं की हत्या, घटना के 10 दिन बाद भी नहीं मिला कलावती के परिवार को न्याय, छह महीने में इस अस्पताल में आधा दर्जन महिलाओं की हो चुकी है मौत

मिर्जापुर. मड़िहान तहसील बहुत कम आबादी वाला मिर्जापुर जिले का पहाड़ी इलाका है. इलाके में अधिकतर गरीब मजदूर परिवार ही बसे हैं। विगत 14 अक्टूबर को क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की लापरवाही और एएननम द्वारा गलत ढंग से प्रसव कराने के चलते कलावती मौर्य और उसके गर्भ में बच्चे की मौत हो गई।

महागरीब परिवार की कलावती मौर्य के पति शिव प्रसाद मौर्य ने बताया कि 14 अक्टूबर की रात को हंसते हुए कलावती डिलीवरी कराने स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती हुई. अचानक हालत बिगड़ने की बात कहकर एएननम और डॉक्टर ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया. आधा घंटे में अस्पताल पहुंचने पर वहां के डॉक्टर ने कहा कि कलावती तो डेढ़ घण्टे पहले मर चुकी है.

 

कलावती के ही गांव की एक महिला सूखा देवी ने बताया कि पिछले 6 महीने में एएनम द्वारा गलत ढंग से प्रसव कराने में आधा दर्जन से भी अधिक महिलाओं और बच्चों की मौतें हुई हैं. सूखा देवी और गांव की अन्य महिलाओं का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में कोई भी महिला डॉक्टर नहीं है. साथ ही अप्रशिक्षित एएनम गर्भवती महिलाओं के गाल और पेट पर लात-घूंसे मारकर प्रसव कराती है जिसकी वजह से हमारी गांव की कई महिलाओं की मौत हो चुकी हैं. कलावती की मौत से गांव में रोष है. कलावती की मौत के बाद से दूसरे दिन तक गांव के लोगों ने स्वास्थ्य केंद्र को घेरे रखा और एएनम व डॉक्टर पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की।

सीएमओ का गैर जिम्मेदाराना बयान

ग्रामीणों ने कलावती की लाश को स्वास्थ्य केंद्र पर रखकर उसकी मौत पर सीएमओ (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) से जवाब मांगा तो संवेदना व्यक्त करने के बजाय उन्होंने कहा कि -” हमने किसी के जीने और मरने का ठेका नहीं ले रखा है।”

आन्दोलन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं पर दर्ज किया केस

कलावती के परिवार को न्याय दिलाने की लड़ाई में शामिल ग्रामीणों का साथ दे रही और अगुवाई कर रही मिर्जापुर जिले की चर्चित दलित नेत्री जीरा भारती और अन्य आंदोलनकारी साथियों पर प्रशासन और पुलिस ने आपराधिक धाराएं लगाकर मुकदमा दर्ज कर लिया है और उन्हें इस मामले पर चुप रहने की धमकी दी जा रही है।

कलावती की मौत के दस दिन बाद भी जब प्रशासन उसके मजदूर पति और 4 साल के बेटे को न्याय नहीं दिला सका तो 24 अक्टूबर को नागरिक अधिकार मंच के साथ भाकपा माले, अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संगठन, खेत मजदूर सभा और इंकलाबी नौजवान सभा ने न्याय मार्च निकाला. आन्दोलनकारियों ने तब तक तहसील को घेरे रखा जब तक एसडीएम सविता यादव ने मांग पत्र लेकर डॉक्टर और एएनम पर कार्रवाई करवाने, कलावती के परिवार को मुआवजा दिलवाने और जीरा भारती पर फर्जी मुकदमा हटाने की मांगों को एक सप्ताह में पूरा करने का आश्वासन नहीं दे दिया.

कलावती की मौत को हत्या करार देते हुए न्याय मार्च में शामिल भाकपा माले के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि बेहतर कानून व्यवस्था का वादा करके बनी योगी सरकार उत्तर प्रदेश को करोड़ों करोड़ की स्वास्थ्य सुविधाएं और ई- सामुदायिक स्वाथ्य केंद्र की बात करती है लेकिन प्रदेश के कमोबेश हर गांव में मौजूद बुनियादी मेडिकल सुविधा विहीन स्वास्थ्य केन्दों में अकुशल एएनम की नियुक्तियां और प्रसव के दौरान महिलाओं की मौतें के आंकड़े दर्शा रहे हैं कि योगी सरकार प्रदेश की गरीब जनता के प्रति बिल्कुल भी संवेदनशील नहीं हैं। योगी सिर्फ कागजी वादे करना जानते हैं उन्हें निभाना नहीं।

न्याय मार्च में शिरकत कर रहीं महिला संगठन ऐपवा की प्रदेश सचिव कुसुम वर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मंहगे किये गए मेडिकल उपचार और स्वास्थ्य केन्दों में बुनियादी मेडिकल सुविधाओं के अभाव में महिलाओं की मौत के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं और इसके लिए सीधे तौर पर वर्तमान योगी सरकार जिम्मेदार है जो गौ रक्षा के नाम पर करोड़ों खर्च करना तो जानती है लेकिन एक गरीब महिला के लिए 5 रु. भी नहीं खर्च कर सकती। इसी वजह से कलावती मौर्य जैसी कई महिलाएं बुनियादी उपचार की कमी से हर रोज मर जाती हैं।

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