29 जुलाई, लखनऊ। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी माले ने प्रयागराज समेत उत्तर प्रदेश में बढ़ रहे दलित समाज पर उत्पीड़न के खिलाफ लखनऊ हजरतगंज लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस आयोजित किया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भाकपा माले के राज्य सचिव कॉमरेड सुधाकर यादव ने कहा कि पूरे उत्तर प्रदेश में बुलडोजर राज चल रहा है। कानून की बात करना अपराध हो गया है उन्होंने कहा कि करछना प्रयागराज में हुई घटना इसका ताजा उदाहरण है।करछना में हुई घटना के लिए स्थानीय सवर्ण सामंती व्यक्तियों को जिम्मेदार बताते हुए इनकी गिरफ्तारी की मांग की और गिरफ्तार बेकसूर दलित आदिवासी समाज के नौजवानों की गिरफ्तारी को गलत मानते हुए रिहा करने की मांग की।
करछना की घटना में पुलिस प्रशासन की भूमिका पूरी तरह से संदिग्ध दिखाई देती है।
भाकपा माले, आइसा, आरवाईए की एक टीम ने घटना की जांच कर रिपोर्ट दी और भडेवरा में हुई पूरी घटना की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराने, 29 जून की घटना के जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों को दंडित करने , भडेवरा घटना सवर्ण सामंती तत्वों के उकसावे के कारण घटी, जिसमें हमले की योजना पहले से ही थी। इन उकसावेबाज तत्वों पर कड़ी कार्रवाई करने ,बेगुनाह दलित नौजवानों पर लगाए गए डेढ़ दर्जन धाराओं में फर्जी आपराधिक मुकदमा वापस लिए जाने और उन्हें जेल से रिहा करने, करछना प्रयागराज के गांवों में पुलिस की छापेमारी बंद करने और इलाके में व्याप्त दहशत को कम करने, मृतक देवीशंकर के परिवार को समुचित मुआवजा, आवास के लिए जमीन और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की।
आज न सिर्फ प्रयागराज बल्कि फतेहपुर, मिर्जापुर से लेकर पूरे प्रदेश में दलित उत्पीड़न की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं जिसको रोकने के लिए सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। बल्कि सरकारी मशीनरी और भाजपा के नेता उत्पीड़न करने वालों के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने गरीबों को बसे हुए जमीन से व्यापक पैमाने पर बेदखल कर देने की साजिश का विरोध करते हुए कहा कि यह सरकार गरीबों से वोट देने के अधिकार को भी छीन लेना चाहती है। भाजपा सरकार दलितों के साथ मुसलमानों की जमीन छीनने का काम पहले से ही नंबर एक पर रखी है जिसको भाकपा माले बर्दाश्त नहीं करेगी।
भाकपा माले राज्य कमेटी सदस्य सह आइसा प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार ने संबोधित करते हुए कहा की प्रयागराज की पुलिस जाति देख कर निर्दोष दलित नौजवानों की गिरफ्तारी की है , नाबालिक बच्चों को भी आपराधिक धारा लगाकर जेल भेज दिया है और महिलाओं तक से बर्बरता पूर्वक व्यवहार की है। इस तानाशाही के खिलाफ बोलने पर मेरे साथ बर्बर सुलूक व दमन करने की योजना बनाई. उन्होंने कहा कि जब तक दलित आदिवासी – नौजवानों की रिहाई सुनिश्चित नहीं होती। हम इस लड़ाई को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।
भाकपा माले राज्य कमेटी सदस्य सह आरवाईए प्रदेश सचिव सुनील मौर्य ने कहा है कि योगी सरकार में दलितों को जलाया जा रहा है और उनको ही जेल भेज दिया जा रहा है और उनके पक्ष में आवाज़ उठाना भी कानून व्यवस्था को ध्वस्त करना बताया जा रहा है। योगी का बुलडोजर राज वंचितों की आवाज को कुचल देने पर आमादा है। हम इसको बर्दाश्त नहीं करेंगे। करछना मामले में भी पुलीस प्रशासन शुरुवात से लेकर आज के प्रदर्शन तक पूरी तरह से सामंतो के पक्ष में है और चुन -चुन कर निर्दोष दलित नौजवानों की गिरफ्तारी और उनके साथ क्रूरता कर रही है।
भाकपा माले राज्य कमेटी सदस्य सह ऐपवा नेता कमला गौतम ने कहा कि महिलाएं असुरक्षित महसूस कर रही हैं। उनके लिए न काम है और न ही किसी तरह की सुरक्षा। स्कीम वर्कर्स महिलाएं कम वेतन के चलते भुखमरी की कगार पर हैं।
आरवाईए प्रदेश उपाध्यक्ष हनुमान अंबेडकर ने कहा कि सरकार न शिक्षा दे रही है न रोजगार। आरक्षण खत्म करने के साथ अब स्कूल मर्जर कर सरकारी स्कूलों को भी खत्म कर दे रही है।
भाकपा माले कल 30 जुलाई को गृह सचिव उत्तर प्रदेश से मिलने का समय मांगा गया है यदि हमारी मांग पूरी नहीं होती है तो भाकपा माले सितंबर मध्य में दलितों आदिवासियों पर बढ़ रहे हमलों के खिलाफ विधानसभा पर प्रदर्शन करने का निर्णय लेगी।
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान राज्य कमेटी सदस्य सह आरवाईए प्रदेश सह सचिव राजीव गुप्ता, आइसा प्रदेश उपाध्यक्ष समर, प्रदेश सह सचिव हर्ष, शांतम निधि, ऐपवा नेता सरोजिनी बिष्ट, सत्यम, शैलेश, रितेश, जैस्मीन, अनुराग उपस्थित रहे।
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