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आइसा के प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार के खिलाफ केस दर्ज करना अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है : जसम

लखनऊ। जन संस्कृति मंच ने आल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) के प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार के खिलाफ फेसबुक पर ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सवाल पूछने पर मुकदमा दर्ज करने की तीव्र भर्त्सना करते हुए कहा है कि यह कार्यवाही अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है।

जन संस्कृति मंच, उत्तर प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष कौशल किशोर की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सरकार से सवाल पूछना, उसकी नीतियों की आलोचना करना, सरकार के विचारों व क्रियाकलाप से असहमत होना तथा अपने विचारों को प्रकट करना, यह लोकतांत्रिक स्वतंत्रता से जुड़ा है। भारत का संविधान अपने नागरिकों को यह आजादी देता है। सोशल मीडिया पर सरकार से सवाल पूछने के कारण आल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) के प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार के खिलाफ आजमगढ़ जिले के कंधरापुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। स्वयं थाना प्रभारी की ओर से इस संबंध का एफआईआर दर्ज कराया गया।

क्या है मनीष कुमार का ‘अपराध’ ? उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट में पाकिस्तान के दावे और भारतीय वायुसेना की क्षति पर सवाल पूछे। अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा राफेल विमान गिराए जाने को लेकर जो कहा जा रहा है, उसकी सत्यता क्या है? इस विषय पर सरकार मौन क्यों है ? उन्होंने समाचार माध्यमों का संदर्भ देकर प्रधानमंत्री मोदी जिन्होंने देश को संबोधित किया, उनसे स्पष्टीकरण की सोशल मीडिया पर मांग की थी। इसी को आधार बनाकर मनीष कुमार के खिलाफ एफआईआर संख्या 0136 में बीएनएस 353 (2) (भड़काऊ बयान) और आईटी संशोधित एक्ट 2008 की धारा 67 (इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसारण) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

  यह अलोकतांत्रिक और गैर-संवैधानिक है, क्योंकि किसी भी नागरिक को सरकार से सवाल पूछने का अधिकार संविधान देता है। जसम ने दर्ज की गई फर्जी एफआईआर को निरस्त करने और कंधरापुर (आजमगढ़) के थाना प्रभारी पद के दुरुपयोग की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में, लोकगायिका नेहा सिंह राठौर और अध्यापिका माद्री काकोटी (डॉ मेडुसा) सहित लखनऊ विवि के दो प्रोफेसरों के खिलाफ भी उनके सोशल मीडिया पोस्ट के कारण ऐसी ही कार्रवाई की गई थी। यह दिखाता है कि मुख्यमंत्री योगी शासित उत्तर प्रदेश में नागरिक स्वतंत्रता का दायरा लगातार संकुचित होता जा रहा है। इसी नक्शे कदम पर अन्य राज्यों की भाजपा सरकारें चल रही हैं।

22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद से देश में असहमति के विचारों के विरुद्ध एक संगठित अभियान चलाया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर सहित अनेक राज्यों में बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किये जाने की खबर है। बहुत से सोशल मीडिया अकाउंट्स पर एफआईआर दर्ज किया गया। सोशल मीडिया साइट्स पर रोक लगाई गई। ये घटनाएं बताती हैं कि आज की भारतीय सत्ता को सबसे बड़ा डर बम और बंदूक से नहीं है बल्कि सवालों से है।

जसम ने अभिव्यक्ति की आजादी व लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमले तथा सरकार के दमन के विरुद्ध लोकतंत्र प्रेमी नागरिकों और संगठनों से एकताबद्ध होने और सरकार की दमनकारी कार्रवाइयों का विरोध करने की अपील की है। जन प्रतिरोध से ही सरकार के फासिस्ट मंसूबों पर रोक लगाई जा सकती है

Fearlessly expressing peoples opinion