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कविता

मारीना त्स्वेतायेवा का तूफानी जीवन और उनकी कविताएँ

क्या आप मारीना को जानते हैं ? आइये, प्रतिभा कटियार आपको उनसे मिलवाती हैं. उनकी ज़िंदगी से और ज़िंदगी की जद्दोजहद से रूबरू करवाती हैं.
खबर

69000 शिक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ न्याय मोर्चा का परीक्षा नियामक प्राधिकारी पर प्रदर्शन 

प्रयागराज. 69000 शिक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ न्याय मोर्चा से जुड़े छात्रों ने आज परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी ) पर प्रदर्शन किया. शारीरिक दूरी
खबर

ऐपवा नेता जीरा भारती पर मिर्जापुर में जानलेवा हमला, चार जुलाई को विरोध प्रदर्शन का ऐलान

समकालीन जनमत
लखनऊ. भाकपा (माले) की प्रदेश कमेटी सदस्य व ऐपवा नेता जीरा भारती पर एक जुलाई की शाम जानलेवा हमला हुआ. हमलावरों के खिलाफ अभी तक
सिनेमा

वर्णव्यवस्था के विद्रूप को उघाड़ती सद्गति

मुकेश आनंद
(महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्मों पर  टिप्पणी के क्रम में आज प्रस्तुत है हिंदी के मूर्धन्य कथाकार प्रेमचंद की कहानी पर आधारित मशहूर निर्देशक सत्यजित रॉय की
चित्रकला

संजीव सिन्हा के चित्रों में लोक का जीवन संघर्ष और कला

कलाकार अपने समकाल से जुडा़ हुआ एक संवेदनशील , स्वप्नदर्शी , कल्पनाशील महत्वकांक्षी प्राणी होता है | वह अपने आस पास की चीजों , घटनाओं
कविता

आलोकधन्‍वा : अपार करुणा का कवि

(मशहूर कवि आलोकधन्वा का आज जन्मदिन है. समकालीन जनमत के पाठकों के लिए प्रस्तुत है युवा आलोचक अवधेश त्रिपाठी का उनकी कविताओं पर लिखा लेख.
पुस्तक

बहुत सी भ्रांतियों को तोड़ती किताब- इस्लाम की ऐतिहासिक भूमिका

समकालीन जनमत
मुहम्मद उमर हम जब कभी बुकशॉप से किताबों को खरीदने जाया करते, तो एम एन राय की पुस्तक ‘इस्लाम की ऐतिहासिक भूमिका’ सामने ही रखी
शख्सियत

प्रो. तुलसी राम के चिंतन व लेखन को सामने लाना ज़रूरी है!

डॉ. रामायन राम
“जब मैं पहले दिन स्कूल पहुंचा तो नाम लिखते हुए अध्यापक मुंशी राम सूरत लाल ने पिता जी से पूछा यह कब पैदा हुआ था?
जेरे बहस

हम पितृसत्ता के खिलाफ हैं, पुरुषों के नहीं: कमला भसीन

समकालीन जनमत
(‘स्त्री संघर्ष का कोरस’ शृंखला के अंतर्गत रविवार 28 जून को कोरस के फेसबुक पेज से प्रसिद्ध नारीवादी कार्यकर्ता, कवि और समाज विज्ञानी कमला भसीन
स्मृति

सलाम चितरंजन भाई ! आप ने दमन, अत्याचार के खिलाफ संघर्ष की जो लौ लगाई, वह कभी नहीं बुझेगी

मैं जब गोरखपुर विश्वविद्यालय में स्नातक की पढ़ाई कर रहा था, तभी पत्रकारिता की तरफ झुकाव शुरू हुआ. वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन शाही (अब सूचना आयुक्त,
जनमत

जिन शहरों ने प्रवासी श्रमिकों से आँखें फेर ली थीं वही उनकी राह में आँखे बिछाये बैठे हैं

( अजीत महाले और के.वी. आदित्य भारद्वाज की यह रिपोर्ट ‘ द हिन्दू ‘ में प्रकाशित हुई है. समकालीन जनमत के पाठकों के लिए इसका
सिनेमा

‘पहली आवाज़’ से शुरू हुआ प्रतिरोध का सिनेमा का ऑनलाइन स्क्रीनिंग अभियान

( पिछले पंद्रह वर्षों से प्रतिरोध का  सिनेमा अभियान सार्थक सिनेमा को छोटी -बड़ी सभी जगहों पर ले जाने की कोशिश में लगा हुआ है
पुस्तक

बल्ली के यहां उम्मीद का एक बच्चा है, जो सारी तानाशाहियों और पूंजी के फैलाये अंधेरे के ऊपर बैठा है

दुर्गा सिंह
हिंदी ग़ज़ल में बल्ली सिंह चीमा एक लोकप्रिय नाम हैं। यह उनका पांचवां ग़ज़ल संग्रह है। इसकी भूमिका हमारे दौर के महत्वपूर्ण आलोचक प्रणय कृष्ण
स्मृति

याद -ए -सादेकैन

अशोक भौमिक
सादेकैन के चित्रों में हम बार-बार मेहनतकश मज़दूरों को केंद्र में देख पाते हैं जहाँ उनके साथ मेहनत करती हुई महिलाएं भी अनिवार्य रूप से
कहानी

लियो टॉलस्टॉय की कहानी: अलीयोश कुल्हड़

समकालीन जनमत
( उन्नीसवीं शताब्दी के महान रूसी उपन्यासकार व कहानी लेखक लियो टॉलस्टॉय द्वारा रचित यह कहानी जीवन के विविध आयाम को छूती है। अत्यंत सरल,
देसवा

‘ हमरो बाबू असो चल गईल ’

( पत्रकार मनोज कुमार के साप्ताहिक कॉलम ‘देसवा ‘ की  दूसरी क़िस्त  ) ‘असो हमहूं चल जाइब’ जब मैं संतकबीर नगर जिले के मेंहदावल ब्लाक
कविता

रूपम की कविताएँ पितृसत्ता की चालाकियों की बारीक़ शिनाख़्त हैं

समकालीन जनमत
दुर्गा सिंह हिंदी समाज एक ऐसी कालावधि से गुजर रहा है, जिसमें एक तरफ निरंतरता की ताकतें, सामाजिक वर्ग- समूह आजादी के बाद के सबसे
खबर

डीजल-पेट्रोल के बेलगाम होते दाम के खिलाफ किया धरना-प्रदर्शन

समकालीन जनमत
आज़मगढ़. डीजल-पेट्रोल के दामों में लगातार हो रही वृद्धि एवं बेलगाम मंहगाई के मुद्दे पर संगठन के देशव्यापी आह्वान पर माले से संबद्ध अ. भा.
खबर

डीजल-पेट्रोल के बढ़े हुए दाम वापस लेने की मांग पर पटना में प्रदर्शन

पटना. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने के वावजूद डीजल-पेट्रोल के दाम में लगातार वृद्धि के खिलाफ आज पटना में इनौस, खेग्रामस और किसान
स्मृति

टूटते हुए लोगों की आवाज थे चितरंजन सिंह

समकालीन जनमत
चितरंजन सिंह हारे-शिकस्त खाए लोगों की आवाज बन बनकर सामने आए. उन्होंने हमेशा अन्याय का प्रतिरोध किया और डटकर किया. वे बार-बार जेल गए.