Category : देसवा

देसवा

बूढी गंडक नदी और एक विस्थापित बूढ़ा

मनोज कुमार सिंह
खाली हो गए लोगों की झोपड़ियां एक पतली सड़क के उत्तर और दक्खिन पानी में डूबी हुई हैं। शाम हो रही है। सड़क पर कुछ...
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सरसो का खेत और मोहम्मदीन का उदास चेहरा

समकालीन जनमत
( पत्रकार मनोज कुमार के साप्ताहिक कॉलम ‘देसवा’ की आठवीं क़िस्त  )    इसी हफ्ते खबर आयी कि कुशीनगर के हवाई अड्डे से सितम्बर महीने...
देसवा

क्या वे सिर्फ समोसा बना रहे थे

मनोज कुमार सिंह
( पत्रकार मनोज कुमार के साप्ताहिक कॉलम ‘देसवा’ की सातवीं क़िस्त  ) जुलाई 2016 के पहले हफ़्ते एक दिन एक अख़बार की छोटी सी खबर...
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गाँव की औरतों का कुबूलनामा- तीन

समकालीन जनमत
कीर्ति   “कत्ले हुसैन असल में मरगे यज़ीद है इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद।” ये वही हुसैन हैं, जिनके लिए उनकी माँ...
देसवा

फूलमनहा में फूल का जनाज़ा

समकालीन जनमत
( पत्रकार मनोज कुमार के साप्ताहिक कॉलम ‘देसवा’ की छठवीं क़िस्त  ) तीन वर्ष पहले की बात है। मैं जब महरजगंज जिले के बृजमनगंज क्षेत्र...
देसवा

गाँव की औरतों का कुबूलनामा- दो

समकालीन जनमत
कीर्ति (कीर्ति, इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बी.ए. अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं। कोरोना और लाॅकडाउन के दौरान उन्होंने गाँव की औरतों के जीवन को...
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गाँव की औरतों का कुबूलनामा-एक

समकालीन जनमत
कीर्ति  (कीर्ति इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बी.ए तृतीय वर्ष की छात्रा हैं। गाँव की औरतों के जीवन को लेकर उन्होंने एक आलेख-श्रृंखला प्रारम्भ की है। इसमें...
देसवा साहित्य-संस्कृति

जसिया की आँखें

( पत्रकार मनोज कुमार के साप्ताहिक कॉलम ‘देसवा ‘ की  पाँचवी क़िस्त  ) मार्च 2006 की बात है। दो वर्षों से कुशीनगर में मुसहर समुदाय...
देसवा

‘ उसकी हर निशानी हटा दी है फिर भी आँखों से उसका चेहरा नहीं जा रहा ’

( पत्रकार मनोज कुमार के साप्ताहिक कॉलम ‘देसवा ‘ की चौथी क़िस्त ) बीआरडी मेडिकल कालेज में 10 अगस्त 2017 को हुए आक्सीजन हादसे के...
देसवा

…वो तीसरी मुलाकात

(पत्रकार मनोज कुमार के साप्ताहिक कॉलम ‘देसवा ‘ की  तीसरी क़िस्त ) नौ वर्ष पहले नवम्बर 2011 में कुशीनगर के नाहर छपरा गांव जाना हुआ....

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