महिलाओं की संगठित ताकत ने बंद करा दी शराब की दुकान

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बनारस शहर के चुरामनपुर गाँव की दलित बस्ती की महिलाएं और स्कूली छात्राएं पिछले एक साल से बस्ती के अंदर शराब की दुकान खुलने से परेशान थीं . कानूनी तौर पर एक गाँव में अंग्रेजी और देशी शराब की एक-एक दुकान का ही प्रावधान है लेकिन लोहता थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस गाँव में कानून व्यवस्था का खुले आम उल्लंघन किया गया और प्रशासन भी आँख पर पट्टी बाँध कर बैठा रहा.

गाँव की महिलाओं को हर रोज शराबियों द्वारा यौन शोषण का शिकार होना पड़ता था. यहाँ तक कि कई छात्राओं ने स्कूल जाना छोड़ दिया था. थाने में कई बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद भी पुलिस कार्रवाई करने के बजाय तमाशबीन बनी रही.

गाँव की एक महिला ने हमें बताया कि “ शराब की दुकान गाँव के मुख्य मार्ग पर स्थित है इसलिए हर रोज हमें और हमारी लड़कियों का अपने घर से निकलना बंद हो गया था. पुलिस भी कुछ नहीं कर रही थी इसलिए हम लोगों ने मन बना लिया था कि अब हमें ही कुछ करना होगा.”

गाँव की महिलाओं ने महिला नेता सरिता पटेल से सम्पर्क साधा और गाँव की महिलाओं के साथ कई बैठकें दुकान बंद कराने के उद्देश्य से की.

10 अप्रैल को भाकपा माले नेता सरिता पटेल के नेतृत्व में चुरामनपुर की महिलाओं ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया. प्रशासन के आश्वासन के एक दिन बाद भी जब शराब की दुकान बंद नहीं हुई तो दूसरे दिन गाँव की महिलाओं ने दुकान का घेराव कर डाला. महिलाओं के संगठित दबाव के आगे पुलिस प्रशासन को झुकना पड़ा और शराब की दुकान को दलित बस्ती से हटाना पड़ा.

अपनी इस जीत की खुशी का इजहार करते हुए उस बस्ती की सुमन का कहना था कि हमारे संघर्ष की यह छोटी जीत है, अभी हम लोगों को गाँव में गैरकानूनी ढंग से खुली दूसरी शराब की दुकानों को हटाने के लिए भी संघर्ष करना है. साथ ही सुमन अपने इस संघर्ष का श्रेय सरिता पटेल को देना चाहती हैं जिसकी वजह से चुरामनपुर की महिलाएं संगठित हो पायीं.

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