पटना में प्रेमचंद जयंती पर हिरावल ने ‘निर्वासन’ का मंचन किया

पटना.कथा सम्राट प्रेमचंद जयंती के अवसर पर आज स्थानीय छज्जूबाग में हिरावल के कलाकारों ने प्रेमचंद की कहानी ‘निर्वासन’ का नाट्य प्रदर्शन किया। साथ ही, फिरकापरस्ती के विरुद्ध रचनाओं का गायन किया. इस अवसर पर हिरावल की ओर से ‘निर्वासन’ के आधार पर निर्मित फिल्म को भी जारी किया गया.  नाटक और फिल्म में काम करनेवाले कलाकार प्रीति प्रभा और राम कुमार हैं. महिलाओं पर बढ़ रही हिंसा और सांप्रदायिक फासीवादी माहौल के खिलाफ आयोजित इस कार्यक्रम के मौके पर उपस्थित दर्शकों को संबोधित करते हुए लेखक संतोष सहर ने…

Read More

भिखारी ठाकुर लिखित ‘ गबरघिचोर ‘ के मंचन के साथ नाट्योत्सव का समापन

भोजपुरी के नामी कवि-नाटककार भिखारी ठाकुर का यह नाटक अभी भी प्रासंगिक है. ‘गबरघिचोर’ सामाजिक संरचना में स्त्री की जगह, महिला-पुरुष सम्बंध और विभिन्न क़िस्म की सांस्कृतिक सत्ताओं से हमारा साक्षात कराता है

Read More

‘ जो बंदिशें लगाते हैं, वे लगाएँगे, जो उन्हें गाते हैं, वो गाएँगे ’

‘ बंदिश ‘ नाटक पुराने और नए कला परिदृश्य के बीच बदलते सांस्कृतिक संसार की झलक तो उभारता ही है, साथ ही वह संस्कृति और सत्ता के सम्बंध की जटिलता को भी उभारने की कोशिश करता है.

Read More

मेरी कोख पर मेरा हक कब बनेगा ?

गोरखपुर. प्रेमचंद पार्क स्थित मुक्ताकाशी मंच पर आज शाम पटना से आयी सांस्कृतिक संस्था ‘ कोरस ‘ ने प्रसिद्ध कथाकार शिवमूर्ति की चर्चित कहानी ‘ कुच्ची का कानून ’ का मंचन किया. यह आयोजन प्रेमचन्द साहित्य संस्थान और अलख कला समूह ने किया था। नाटक को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक जुटे. नाटक के मंचन के बाद वरिष्ठ कथाकार मदन मोहन ने नाटक की निर्देशक एवं कोरस की सचिव समता राय को स्मृति चिन्ह प्रदान किया. ‘ कुच्ची का कानून ‘ गांव के गहरे अंधकूप से एक स्त्री…

Read More

‘गाय’ नाटक का मंचन रोके जाने का कलाकारों ने किया विरोध

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के इशारे पर शाहजहांपुर जिला प्रशासन द्वारा ‘गाय’ नाटक के मंचन पर रोक लगाने का इप्टा, जसम, प्रलेस, जलेस, साझी दुनिया, अर्थ, अमिट, कलम, राही मासूम रज़ा एकेडमी आदि प्रगतिशील व जनवादी सांस्कृतिक संगठनों तथा लेखकों व कलाकारों ने अपना तीखा विरोध प्रकट किया है। उनका कहना है कि यह न सिर्फ कला की स्वतंत्रता व  अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है बल्कि यह सत्ता की फासिस्ट कार्रवाई है। इसका एकजुट प्रतिवाद जरूरी है, न मात्र कलाकारों के द्वारा बल्कि लोकतांत्रिक संगठनों व व्यक्तियों…

Read More

बेगूसराय में भिखारी ठाकुर के लोक प्रसिद्ध नाटक ‘ गबरघिचोर ’ का मंचन

बेगूसराय (बिहार ). बेगूसराय के दिनकर कला भवन  में दो दिवसीय रंगताल नाट्योत्सव के अंतिम दिन 17 फरवरी को को भिखारी ठाकुर का लोक प्रसिद्ध नाटक ‘ गबरघिचोर ’ का मंचन रंग संस्था ‘ रंगताल ’ द्वारा किया गया। नाटक गबरघिचोर एक ऐसी स्त्री की कहानी है जिसका पति शादी करने के तुरंत बाद परदेश कमाने चला जाता है। 15 साल बाद जब वह लौट कर आता है तो उसे पता चलता है कि उसका 12 साल का बेटा है. वह बच्चे को अपने साथ परदेश ले जाने का प्रयास करता…

Read More

‘ हमारे वतन की नयी ज़िन्दगी हो ‘

कोरस ने पटना में ‘एक शाम गोरख के नाम’ अयोजीय किया पटना , 28 जनवरी. कोरस द्वारा जनकवि गोरख पांडेय की स्मृति दिवस के पूर्व संध्या पर 28 जनवरी को ‘एक शाम गोरख के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन ,गांधी मैदान में किया गया. यह कार्यक्रम वरिष्ठ कवि चंद्रकांत देवताले,कुंवर नारायण, गायिका गिरिजा देवी,साहित्यकार सुरेंद्र स्निग्ध ,दूध नाथ सिंह और प्रो. विनय कंठ को समर्पित था.कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि आलोक धन्वा थे. कार्यक्रम की शुरुआत गोरख पांडेय द्वारा लिखित ‘हमारे वतन की नयी ज़िन्दगी हो’ गीत से हुई.उसके बाद…

Read More