भारतीय चित्रकला में स्त्री को उपेक्षित रखा गया है- अशोक भौमिक

पटना: 13 अगस्त 2018. ‘‘भारतीय चित्रकला में ज्यादातर पुरुषों और पितृसत्तात्मक समाज को महिमामंडित करने का कार्य ही किया गया है। स्त्रियों को दोयम दर्जे का स्थान दिया गया है और उन्हें पुरुषों पर आश्रित दिखाया गया है।’’ ये बातें प्रख्यात चित्रकार अशोक भौमिक ने जन संस्कृति मंच द्वारा स्थानीय छज्जूबाग में आयोजित व्याख्यान ‘भारतीय चित्रकला में स्त्री’ में कही। यह कार्यक्रम बिहार और पूरे देश में स्त्रियों के साथ हो रही यौन-हिंसा की नृशंस घटनाओं के खिलाफ आयोजित था। अशोक भौमिक ने व्याख्यान-प्रदर्शन के दौरान यह बताया कि प्राचीन…

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जनसंस्कृति की वाहक कला और सपना सिंह की रचना

” द ट्रु आॅफ हाफ वर्ल्ड “ सपना सिंह के, एक चित्रण श्रृंखला का शीर्षक है.  इस तरह के विषय के चयन की परंपरा चित्रकला जगत में लगभग नहीं रही है. बिल्कुल इस सदी में कुछ चित्रकारों ने इस तरह के विषय केन्द्रित चित्रण की शुरुआत की. आम तौर पर कला की शिक्षा देने वाले हमारे विश्वविद्यालय, तमाम रचनात्मक संभावनाओं को विधिवत् कूट पीस कर एक ऐसा ड्राफ्टमैन बना डालते हैं, जिसे अपनी सृजनात्मकता हासिल करने में एक लंबा वक्त लगता है. बल्कि बहुत तो एक टूटपूंजिया कारीगरी में ही…

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घाट पर प्रतीक्षा : ज़ैनुल आबेदिन का एक महान चित्र

सदियों से चित्रकला में ऐसे सहज-सरल लोगों की जिन्दगियों से जुड़े साधारण विषयों पर कभी किसी ने चित्र बनाने की जरूरत नहीं समझी. ज़ैनुल आबेदिन उन चित्रकारों में प्रमुख थे जिन्होंने अपने चित्रों में ऐसे साधारण से लगने वाले विषयों पर असाधारण चित्र बना कर , दर्शकों को चित्रकला की नयी संभावनाओं के साथ परिचित कराया.

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युवा मूर्तिकार कृष्णा कुमार पासवान : प्रगतिशील वैचारिक प्रतिबद्धता और प्रभावशाली सम्प्रेषणीयता

  हमारे देश में मूर्तिकला की बहुत ही समृद्ध परंपरा रही है. शास्त्रीय स्तर की बात करें या लोक शैली की या फिर आधुनिक कला या समकालीन कला जगत की, मूर्तिकारों की अनथक मेहनत और रचनात्मकता हमें बहुत प्रभावित करती है. यद्यपि मूर्तिकला की सीमा यह है कि उसका स्वरूप मूल रूप से स्थूल होता है. मानवीय मष्तिष्क की जटिलता बढ़ने के साथ कला की रचनात्मक जटिलता का विस्तार बहुत स्वभाविक है जिसमें मूर्तिकला का स्थूल स्वरुप आड़े आता है. दक्ष मूर्तिकार निरंतर अभ्यास, प्रयोगधर्मिता और प्रतिबद्धता के बदौलत, सृजनात्मक…

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चित्तप्रसाद का 1940 में बनाया गया ‘ जलियांवाला बाग ’ हत्याकांड पर एक दुर्लभ चित्र

इस चित्र को क्रूर औपनिवेशिक शासन के विरोध में एक मुक्तिकामी चित्रकार के साहसिक कला कर्म के रूप देखा जाना चाहिए. साथ ही यह सुदूर पंजाब की इस घटना पर पूर्वी बंगाल के चटगाँव के एक युवा चित्रकार के सही अर्थों में प्रादेशिकता की संकीर्णता से परे जाकर शोषितों के ‘चित्रकार’ की बनने की प्रक्रिया का एक अहम् चित्र भी है. अपनी कला यात्रा में , बाद के दौर में चित्तप्रसाद ने महाराष्ट् , तमिलनाडु , आंध्र प्रदेश , कश्मीर और बंगाल आदि प्रांतों की जनता और उनके सुख-दुःख को अपने…

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काला सच और रणजीत सिंह की कला

अमेरिकी कला ने परम स्वतंत्रता के नाम पर एक तरफ अमूर्तन की भूलभुलैया खड़ी की तो दूसरी तरफ फोटो रियलिज्म ( सुपर रियलिज्म या हाइपर रियलिज्म) को भी खड़ा करने का श्रेय उसी को जाता है. 1960 के दशक के अंत और 1970 के शुरूआती दौर में लगभग पाॅप आर्ट के बाद के दौर में फोटो रियलिज्म नाम से एक सशक्त शैली आकार लेने लगी. यद्यपि यह दौर ऐसा था जिसमें कला आंदोलन के बनने बिगड़ने में समय नहीं लगता था. इस दौर में कला शैलियों की लगभग ऐसी बाढ़…

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कुम्भ मेले का लोगो : कला की सरकारी समझ का नायाब नमूना

अख़बार में छपे फोटो से पहले तो मुझे यह लगा कि उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री प्रयाग में 2019 में होने वाले कुम्भ मेले का पोस्टर जारी कर रहे हैं , पर खबर पढने  से पता चला कि यह पोस्टर नहीं बल्कि कुम्भ मेला- 2019 का आधिकारिक लोगो है । लोगो या प्रतीक चिन्ह मूलतः एक पहचान चिन्ह ही होता है जिसका सांकेतिक और कलात्मक होने के साथ-साथ व्यावहारिक होना जरूरी है जिससे उसकी प्रतिलिपि बनाना सहज ( रिप्रोड्यूसिबल) हो और किसी कार्यक्रम के प्रचार के लिए उसका व्यापक…

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कामगार महिलाओं के संघर्ष का दिवस है महिला दिवस, मिथक और बाजार का नहीं

( राधिका मेनन के रेखा चित्रों से जानिए अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास ) महिला दिवस की शुभकामनाएं एक दिन पहले से आने लगीं। इन शुभकामना संदेशों में कुछ औरतों के सौन्दर्य पर थे, कुछ अच्छी बेटी, पत्नी, बहू, मां होने पर था। कछ ऐसे मैसेज भी थे जिसमें बधाई देने के साथ ही महिला दिवस पर चेहरे की मालिश कराने पर 30 फीसदी का डिस्काउंट देने की बात कही गई थी। आठ मार्च की सुबह से तो महाभारत की महिला किरदारों की ताकत पर कहानी गढते हुए संदेश आए…

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कद से बड़े कैनवास : श्वेता राय के चित्र

राकेश कुमार दिवाकर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में मुहम्मदाबाद छोटा सा शहर है. उस छोटी सी जगह से एक लड़की का आधुनिक कला जगत तक का सफर कई मायनों में असाधारण है. कदम दर कदम चुनौतियों से जुझती श्वेता राय के कैनवास का कद आज निस्संदेह श्वेता से बड़ा है. पुरुषवादी सामंती मानसिकता वाला एक पिछड़ा समाज लड़कियों के लिए एक कैदखाने की तरह होता है. वहां से किसी लड़के को भी कला की आधुनिक दुनिया में पहुंचना बहुत दुष्कर कार्य होता है और लड़की का पहुंचना तो एक…

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तमाम सीमाओं को तोड़ती वरुण मौर्य की कलाकृति

राकेश कुमार दिवाकर 20 वीं सदी के उत्तरार्ध में नयी- नयी तकनीकी अनुसंधान और विकास ने कला के क्षेत्र में आमूल चूल परिवर्तन किया। 21 वीं सदी में चित्र कला, छापा कला और मूर्ति कला के भेद मिट से गए और लगभग हर पारंपरिक सीमाएं टूट गईं । कलाकारों ने साहसिक तरीके से कला को परिभाषित किया जिसे न्यू मीडिया के नाम से जाना जाता है। इस मीडिया में कई कला छात्रों का काम भी रेखांकित करने योग्य है। वरुण मौर्य (जो फिलहाल हैदराबाद विश्वविद्यालय से कला में स्नातकोत्तर की…

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गाजीपुर में कला प्रदर्शनी के 11 चित्र

  उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में सम्भावना कला मंच और महिला महाविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में 4 और 5 फरवरी को कला प्रदर्शनी उद‍्भव का आयोजन किया गया. कला प्रदर्शनी में 100 चित्रकारों के चित्र, मूर्ति शिल्प, स्टालेशन आर्ट प्रदर्शित किये गए . जन संस्कृति मंच से जुड़ा संभावना कला मंच वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में कला प्रदर्शनी आयोजित करता रहा है. गाजीपुर की कला प्रदर्शनी के 11 चित्रों को आप भी देखिये.    

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गाजीपुर में कला प्रदर्शनी में 100 चित्रकारों के चित्र, मूर्ति शिल्प, स्टालेशन आर्ट का प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में आज सम्भावना कला मंच और महिला महाविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में महिला महाविद्यालय के सभागार में उद‍्भव शीर्षक दो दिवसीय कला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया जिसमें लगभग 100 चित्रकारों के चित्र, मूर्ति शिल्प, स्टालेशन आर्ट प्रदर्शित हुए. प्रदर्शनी का उदघाटन महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. सविता भारद्वाज, डॉ. गजाधर प्रसाद शर्मा ‘गंगेस ’, प्रो. राम प्रकाश कुशवाहा, डॉ. दीप्ती सिंह, डॉ. राज कुमार सिंह, डॉ. सूर्यनाथ पाण्डेय, व्यासमुनि राय, राजीव कुमार गुप्ता, संतन के. राम, सविका आब्दी आदि ने कैनवस पर चित्र बनाकर किया. कला…

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