पूनम वासम की कविताएँ सजग ऐंद्रिय बोध और वस्तु-पर्यवेक्षण की कविताएँ हैं

हिन्दी कविता में आदिवासी जमीन से आने वाली पहली कवयित्री सुशीला सामद हैं। उनका संग्रह “प्रलाप” नाम से 1935 में, सुभद्रा कुमारी चौहान और महादेवी वर्मा के संग्रहों के लगभग साथ ही छपा था। उस समय उनकी स्वीकार्यता का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि उनके इस पहले ही संग्रह की भूमिका सरस्वती पत्रिका के ख्यात संपादक देवीदत्त शुक्ल ने लिखी। उस छोटी-सी भूमिका में वे दो महत्त्वपूर्ण सूत्र प्रस्तावित करते हैं, जिनपर पुनर्विचार की ज़रूरत है। वे लिखते हैं कि “प्रलाप नामधारी इस करूण-रस-पूर्ण ‘अंतर्लाप’ को पढ़कर…

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