शहीदे आज़म भगत सिंह के जन्मदिन पर हल्द्वानी में भाकपा माले की इंकलाब रैली

भाकपा(माले) ने 28 सितंबर को शहीदे आज़म भगत सिंह के जन्मदिवस पर “इंकलाब रैली” का आयोजन किया। इस रैली में हेतु माले के मजदूर, किसान व महिला संगठनों के सदस्य सैकड़ों की संख्या में अब्दुल्ला बिल्डिंग के समक्ष एकत्रित हुए और वहाँ से लाल झंडों से सुसज्जित रैली ने नारेबाजी करते हुए बुद्ध पार्क की ओर मार्च किया।

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एन.एच.74 भूमि घोटाला : अफसरों की बलि से किसकी जान बची ?

उत्तराखंड में दो आई.ए.एस. अफसरों चंद्रेश कुमार यादव और पंकज कुमार पाण्डेय को एन.एच.74 के भूमि घोटाले में निलंबित किए जाने की खबर है. इस घोटाले में राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिग्रहण के लिए ज़मीनों के अधिग्रहण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ झाला हुआ.इस मामले में कुछ पी.सी.एस. अधिकारियों समेत राजस्व कर्मी जेल में हैं. बहरहाल दो आई.एस.अफसरों के निलंबन की खबर के साथ ही होड़ मच गयी, सरकार की पीठ ठोकने की कि त्रिवेन्द्र रावत पहले मुख्यमंत्री हैं,जिन्होने आई.ए.एस. अफसरों को निलंबित किया है. यह होड़ जानकारी के अभाव में…

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उत्तराखंड के पूर्व महानिदेशक बी.एस. सिद्धू पर एनजीटी ने 46.14 लाख का जुर्माना लगाया

उत्तराखंड पुलिस के पूर्व महानिदेशक बी.एस. सिद्धू पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल-एन.जी.टी.) ने 46,14,960 रुपये ( छियालिस लाख चौदह हजार नौ सौ साठ रु.) का जुर्माना लगाया है. प्रदेश में नौकरशाही में भ्रष्टाचार का चर्चा तो बहुत होता रहा है, लेकिन पुलिस के सर्वोच्च पद पर रह चुके किसी अफसर के खिलाफ सजा या आर्थिक दंड का संभवतः पहला मामला है. जिस मामले में सिद्धू को भारी भरकम आर्थिक दंड की सजा हुई है. इस पूरे मामले को देखें तो ऐसा लगता है कि कोई फिल्मी कहानी चल रही है, जिसमें उच्च पद पर बैठा व्यक्ति खलनायक का रोल अदा कर रहा है.

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एक समाज के रूप में कहाँ पहुँच गए हैं हम ?

इस घटना में पहले दिन से जैसे आरोपियों को भीड़ के हवाले करने की मांग की गयी,वह चिंताजनक संकेत हैं. कल्पना करके देखिये कि पहले दिन जो लोग संदिग्ध बताए गए,यदि वे भीड़ के हाथ पड़ गए होते तो क्या होता ? निश्चित ही वे भीड़ द्वारा बेहद भयानक तरीके से मार डाले गए होते. भीड़ उन्हें मारती और मारने वालों में वह व्यक्ति भी शामिल होता, जिसे अब हत्यारा बताया जा रहा है. क्या यह न्याय होता ? वही न्याय,जिसके नाम पर भीड़,पुलिस द्वारा पकड़े गए लोगों को अपने हाथों सौंपने की मांग कर रही थी ?

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कबूतरी देवीः पहाड़ी बेगम अख़्तर का मज़दूर चेहरा

बुलन्द आवाज़ और खनकदार गले की मलिका स्वर कोकिला लोक गायिका कबूतरी देवी 7 जुलाई की सुबह दुनिया से विदा हो गईं और फ़िज़ाओं में छोडकर गईं अनगिनत गीत और ढेर सारा सुमधुर संगीत. उनकी लाजवाब गायिकी के सुरीले बोल हमेशा उनके चाहने वालों के कानों में गूंजते रहेंगे,

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धुमाकोट बस दुर्घटना के लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं : राजा बहुगुणा

भाकपा माले की केंद्रीय कमेटी के सदस्य राजा बहुगुणा ने पौड़ी गढ़वाल मंडल के धुमाकोट में हुई बस दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिजनों प्रति संवेदना प्रकट करते हुए मृतकों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की। राजा बहुगुणा ने पहाड़ में लगातार हो रही वाहन दुर्घटनाओं के लिए सरकार की नीतियों को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि, “आमतौर पर पहाड़ में चल रहे सार्वजनिक वाहन निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते जिसके चलते दुर्घटनाएं आम हो गई हैं। सरकार की दुर्घटना के समय दिखाई जाने वाली तात्कालिक मुस्तैदी बगैर मानकों…

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‘ अनशन करते मेरे प्राण होम हो जाएँ तो मेरे शरीर को विधायक के घर में फेंक देना ’

विकास के दावों-नारों के शोर के बीच देवपुरी गाँव आज भी सड़क से महरूम है. चार किलोमीटर की सड़क के लिए दो-दो मुख्यमंत्रियों ने घोषणा की , विधायकों ने वादे किये लेकिन सड़क आज तक नहीं बन सकी. गांव के लोग आन्दोलन कर रहे हैं. रघुवीर सिंह रावत 5 जून से आमरण अनशन पर हैं और उनका कहना है कि सड़क बनने तक उनका अनशन जारी रहेगा, चाहे उनकी जान ही क्यों न चली जाय.

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सीख़चों के बाहर कैद पुलिस

पुलिस कर्मियों की कार्यस्थितियों में समुचित सुधार का एजेंडा न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने उत्तराखंड सरकार के सामने रख दिया है. यह देखना रोचक होगा कि इस फैसले का कितना अनुपालन राज्य सरकार और पुलिस महकमा करता है. पुलिस को लोकतान्त्रिक बनाए जाने की जरूरत है और पुलिस को लोकतान्त्रिक अधिकार दिया जाना भी आवश्यक है.

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तिलाड़ी शहादत स्मृति : जंगल, जमीन, पानी पर जनता के अधिकार की लड़ाई जारी है

राजशाही शहीदों के खून के वेग में बह गयी.पर हमारे लोकतंत्र के खेवनहारों ने राजाओं के गुण बखूबी आत्मसात किये. उन्हें जंगल,जमीन,पानी के लिए लोगों का खून बहाना मंजूर है पर संसाधनों पर जनता का अधिकार मंजूर नहीं है. तिलाडी के हमारे बहादुर पुरखों से चली आ रही यह लड़ाई,आज भी जारी है,हत्यारी राजशाही के गुणसूत्र वाले वर्तमान हुक्मरानों से.

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