आधार पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय : आने वाला इतिहास असहमति वाले अल्‍पमत निर्णय को ही सही ठहरायेगा

सर्वोच्‍च न्‍यायालय का निर्णय लाखों लोगों को मायूस करने वाला है, क्‍योंकि देश के गरीबों को पीडीएस एवं मनरेगा जैसी जनकल्‍याण की योजनाओं से वंचित करने के लिए आधार का इस्‍तेमाल करने की वैधता प्रदान कर दी गई है. सर्वोच्‍च न्‍यायालय इस इस तथ्‍य को महसूस करने में असफल रहा है कि भोजन या रोजगार का हक़ ऐसे अधिकार हैं जिनसे किसी को भी, किसी भी आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता है. बड़े पैमाने पर मौजूद इस तथ्‍य को भी पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है कि आधार में एनरोलमेण्‍ट कराने को बाद भी 27 प्रतिशत गरीबों को जनकल्‍याण योजनाओं का लाभ नहीं दिया जा रहा है.

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मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी : सर्वोच्‍च न्‍यायालय की निगरानी में एस.आई.टी. द्वारा जांच ही उचित

यह संतोषजनक है कि पुणे पुलिस द्वारा बिना जांच किये ही आरोप लगा कर जेल भेजने की सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने अनुमति नहीं दी और उन्‍हें हाउस अरेस्‍ट में ही रखा, लेकिन बेहतर होता कि सर्वोच्‍च न्‍यायालय की निगरानी में एस.आई.टी. द्वारा जांच करवाई जाती क्‍योंकि पुणे पुलिस की गतिविधियों में खुद ही कई गैरकानूनी काम हुए हैं, जिन्‍हें कि इस मामले में जस्टिस चन्‍द्रचूड़ ने असहमति वाले अल्‍पमत के निर्णय में चिन्हित किया है.

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