एक कविता: हिंग्लिश [शुभम श्री]

शुभम श्री हमारे साथ की ऐसी युवा कवि हैं जिनकी कविताओं में बाँकपन की छब है। एक ख़ास तंज़ भरी नज़र और भाषा को बरतने की अनूठी सलाहियत। आज पढ़िए उनकी एक कविता ‘हिंग्लिश‘। हमारे संगी कवियों को यह सवाल बेहद परेशान करता है कि भाषा का क्या करें ? इतनी अर्थसंकुचित और परम्पराक्षीण शब्द सम्पदा वाली भाषा में कविता कैसे सम्भव हो ? यह सवाल हिंदी में लगभग हर दौर के कवि को तंग करता रहा है और हर दौर में इसके जवाब मुख़्तलिफ़  आये। मैथिलीशरण गुप्त से लेकर…

Read More