बादल की कविता जीवन की कविता है : रविभूषण

बादल की कविताएं वर्गीय दृष्टि की कविताएं हैं : रामजी राय ‘शंभु बादल का कविकर्म’ पर हजारीबाग में आयोजन हजारीबाग के डीवीसी, प्रशिक्षण सभागार में 14 अक्टूबर 2018 को वरिष्ठ कवि शंभु बादल के कविकर्म पर जन संस्कृति मंच की ओर से एक आयोजन संपन्न हुआ, जिसका संचालन कवि बलभद्र ने किया। अध्यक्षता वरिष्ठ आलोचक रविभूषण ने की। रविभूषण ने शंभु बादल को हिंदी की क्रांतिकारी धारा का कवि बताते हुए कहा कि वे संघर्षशील मुक्तिकामी कवियों की उज्जवल कतार में शामिल हैं। भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल,…

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शंभु बादल का कवि कर्म

हरेक कवि की अपनी जमीन होती है जिस पर वह सृजन करता है और उसी से उसकी पहचान बनती है। निराला, पंत, प्रसाद, महादेवी समकालीन होने के बाद भी इसी विशिष्टता के कारण अपनी अलग पहचान बनाते हैं। यही खासियत नागार्जुन, शमशेर, केदार व त्रिलोचन जैसे प्रगतिशील दौर के कवियों तथा समकालीनों में भी मिलती है। शंभु बादल की काव्य भूमि भी अपने परिवेश से निर्मित होती है। 70 के दशक में हिन्दी कविता के क्षेत्र में जो नई पीढ़ी आई, शंभु बादल उस दौर के कवि हैं। अपनी लम्बी…

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