युवा मूर्तिकार कृष्णा कुमार पासवान : प्रगतिशील वैचारिक प्रतिबद्धता और प्रभावशाली सम्प्रेषणीयता

  हमारे देश में मूर्तिकला की बहुत ही समृद्ध परंपरा रही है. शास्त्रीय स्तर की बात करें या लोक शैली की या फिर आधुनिक कला या समकालीन कला जगत की, मूर्तिकारों की अनथक मेहनत और रचनात्मकता हमें बहुत प्रभावित करती है. यद्यपि मूर्तिकला की सीमा यह है कि उसका स्वरूप मूल रूप से स्थूल होता है. मानवीय मष्तिष्क की जटिलता बढ़ने के साथ कला की रचनात्मक जटिलता का विस्तार बहुत स्वभाविक है जिसमें मूर्तिकला का स्थूल स्वरुप आड़े आता है. दक्ष मूर्तिकार निरंतर अभ्यास, प्रयोगधर्मिता और प्रतिबद्धता के बदौलत, सृजनात्मक…

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