1984 के सिख क़त्ले-आम के मुजरिमों की तलाश का 34 साल लम्बा पाखंड !

1984 के सिखों के क़त्लेआम के मामले में आरएसएस/भाजपा अपने आप को कांग्रेस से भिन्न साबित करने के लिए चाहे जो भी दावे करे लेकिन दोनों में तनिक भी अंतर नहीं है। इन दोनों से कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। मुजरिमों की खोज और उनको उचित सज़ा दिलाने का मक़सद तभी पूरा हो सकता है, जब हम भारतीय एक साथ 34 साल से चल रहे ‘न्याय के पाखंड’ के खिलाफ लामबंद होंगे। यह लड़ाई सिखों को इन्साफ दिलाने के लिए ही नहीं है बल्कि एक प्रजातान्त्रिक-धर्मनिरपेक्ष देश को बचने की भी है।

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‘ भविष्य का भारत ’ की संघी दृष्टि

संघ भविष्य के भारत को हिन्दू राष्ट्र मानेगा। इसे सभी नहीं मान सकते। राजनीतिक दलों को वोट की चिन्ता है। इसलिए वे खुलकर हिन्दू राष्ट्र के विरोध में खड़े नहीं होंगे, पर बौद्धिक वर्ग जो क्रीतदास नहीं है, वह हिन्दू राष्ट्र का सदैव विरोध करेगा। भविष्य का भारत केवल हिन्दुओं का भारत नहीं हो सकता। नहीं होना चाहिए। हिन्दुत्व और भारतीय तत्व दोनों एक नहीं है। कभी हो भी नहीं सकते हैं।

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दक्षिणपंथ की कीलें

भगवा खेमे के लिये अपने मंसूबो को पूरा करने के लिए 2019 का चुनाव निर्णायक है और इसके लिये वे कुछ भी करेंगे. यह चुनाव इतना भव्य और नाटकीय होगा जिसकी अभी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं.

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सेक्युलर इंडिया से इतनी दिक़्क़त क्यों है ?

डर या लालच के मारे किसी राजनैतिक दल का पिछलग्गू हो जाना या सरकारी भोंपा बन जाना तो समझ आता है, लेकिन क्या अब भारतीय मीडिया के इस धड़े का संपादकीय नागपुर में लिखा जा रहा है.

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विज्ञान से बैर की वैचारिकी

28 फरवरी को प्रसिद्ध नोबल पुरुस्कार विजेता सी.वी.रामन के जन्मदिन को भारत में विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता.इस बार इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी में आयोजित विज्ञान दिवस के आयोजन के उद्घाटन के लिए अकादमी द्वारा केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह को आमंत्रित किया गया था. सत्यपाल सिंह मुंबई पुलिस के कमिश्नर रहे हैं.वे बागपत से भाजपा के टिकट पर जीत कर लोकसभा पहुंचे हैं और पिछले वर्ष सितम्बर में  केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री पद से नवाजे गए.इस वर्ष जनवरी में उन्होंने…

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