तीन वर्षों में 200 घर बड़ी गंडक में समाए, अपने हाथों से अपना घर गिरा रहे हैं ग्रामीण

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में बड़ी गंडक नदी की कटान से तमकुही तहसील के एपी तटबंध के पास कई गांव नदी में समाते जा रहे हैं. लोग अपने हाथों से अपने घरों को गिरा रहे हैं ताकि ईंट आदि बचा सकें. एक पखवारे में अहिरौलीदान के चार टोले के 30 घर नदी की कटान की जद में आ चुके हैं. इन गांवों में पहले से 200 से अधिक घर नदी में समा चुके हैं.

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प्रदीप कुमार सिंह की कविताएँ : विह्वल करने से ज़्यादा विचार-विकल करती हैं

नदी समुद्र में जाकर गिरती है, यह तो सब जानते हैं. लेकिन यह सच्चाई तो प्रदीप की कविता को पता है कि नदी अपना दुःख दूसरी नदियों को सुनाने जाती है. क्योंकि स्त्री का दुःख स्त्री ही समझ सकती है. नदी जानती है कि समुद्र में उसका अस्तित्व खो जायेगा. इसलिए अपने होने का अर्थ एक नदी को दूसरी नदी ही बता सकती है.
लोकतंत्र के नाम पर जिस तंत्र का त्रास हमारे जन-सामान्य को झेलना पड़ रहा है, प्रदीप की निगाह उस पर भी रहती है. करुणा और व्यंग्य के मेल से ऐसी कविताएँ विह्वल करने से ज्यादा विचार-विकल करती हैं

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