निराला की कविता मनुष्य की मुक्ति की कविता है

(महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला (21 फ़रवरी-15 अक्टूबर) की पुण्यतिथि पर अपने लेख के माध्यम से उन्हें याद कर रहें हैं विवेक निराला)  निराला को अपने समय में ‘महाप्राण ’ कहा गया था और यह एकदम सही भी था क्योंकि उस पूरे दौर में एक कवि अपने समय के कई अल्पप्राण प्रतिमानों को चुनौती दे कर अपना महाप्राणत्व सिद्ध कर रहा था। अपने युग में कई तरह की आलोचनाओं और प्रत्यालोचनाओं को झेलते हुए इस कवि ने पहली बार ’मनुष्य की मुक्ति की तरह कविता की मुक्ति’ की अवधारणा प्रस्तुत की…

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