एक कविता: चोरी-चुप्पे [प्रकाश उदय]

कविता ‘चुप्पे-चोरी’, जो एक लड़की की बहक है। यह लड़की गाँव की है, नटखट है। उसने उड़ने के लिए चिड़िया के पंख और गोता लगाने के लिए मछली की नाक हासिल कर ली है। लेकिन ये सपने ही सब कुछ नहीं हैं। उसके सपनों की दुनिया का हक़ीक़त की दुनिया से एक दिलचस्प रिश्ता है। यही रिश्ता इस कविता में जान भरता है।

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