पत्थलगड़ी से क्यों भयभीत है राज्य सत्ता

आदिवासियों ने जिस झारखंड राज्य के गठन के लिए सात दशकों तक संघर्ष किया उसी राज्य में अब उन्हें अपनी आजीविका के संसाधनों को सुरक्षित रखने के लिए संघर्ष करना पड़ा रहा है. आदिवासियों को यह बात मालूम हैं कि उनका अस्तित्व बरकरार रखने के लिए उनके पास संघर्ष करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है. यही रास्ता राज्यसत्ता को भयभीत करती है क्योंकि जनांदोलन तथाकथित विकास और आर्थिक तरक्की के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों के लूट पर अड़ंगा लगाता है.

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पत्थलगड़ी आंदोलन की जड़ें

आदिवासियों के साथ प्रगति, विकास, जनहित, राष्ट्रहित एवं आर्थिक तरक्की के नाम पर धोखा किया गया है। इसलिए अब वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन, इलाके और प्राकृतिक संसाधनों को काॅरपोरेट को देने के लिए तैयार नहीं हैं। पत्थलगड़ी आंदोलन की जड़ें यहीं हैं।

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