शतवर्ष स्मरण : देबब्रत मुखोपाध्याय (1918-1991)

समकालीन जनमत के ‘ तस्वीरनामा ’ में इस बार चित्रकार देबब्रत मुखोपाद्ध्याय पर एक विशेष लेख और उनके चित्रों का एलबम प्रकाशित कर रहें हैं. यह वर्ष देबब्रत मुखोपाद्ध्याय का जन्म शताब्दी वर्ष है और इस लेख के माध्यम से हम समकालीन जनमत की ओर से ‘देबू दा ‘ को क्रांतिकारी सलाम पेश करते हैं. आज देबब्रत मुखोपाध्याय के जन्मशती वर्ष पर उन्हें याद करना, हमारे देश के उन क्रांतिकारी चित्रकला को याद करना है , जिसे सरकारी कला अकादमियाँ और गैरसरकारी गैलरियाँ जनता तक कभी नहीं पहुँचने देना चाहेंगी

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जनसंस्कृति की वाहक कला और सपना सिंह की रचना

” द ट्रु आॅफ हाफ वर्ल्ड “ सपना सिंह के, एक चित्रण श्रृंखला का शीर्षक है.  इस तरह के विषय के चयन की परंपरा चित्रकला जगत में लगभग नहीं रही है. बिल्कुल इस सदी में कुछ चित्रकारों ने इस तरह के विषय केन्द्रित चित्रण की शुरुआत की. आम तौर पर कला की शिक्षा देने वाले हमारे विश्वविद्यालय, तमाम रचनात्मक संभावनाओं को विधिवत् कूट पीस कर एक ऐसा ड्राफ्टमैन बना डालते हैं, जिसे अपनी सृजनात्मकता हासिल करने में एक लंबा वक्त लगता है. बल्कि बहुत तो एक टूटपूंजिया कारीगरी में ही…

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