भुलाए नहीं भूलेगा यह दिन

कमरे में चौकी पर बैठे थे नागार्जुन. पीठ के पीछे खुली खिड़की से जाड़े की गुनगुनी धूप आ रही थी. बाहर गौरैया चहचहा रही थी. तभी पहुंचे कॉ. विनोद मिश्र, कवि से मिलने कवि के पास. समय ठिठका-सा रहा, शब्द चूक-से गए. नागार्जुन ने वीएम के चेहरे को कांपती उंगलियों से टटोला. देर तक नाक, कान, ठुड्डी को छूते रहे। उनकी भाव विह्वल आंखें चमक से भर गईं.

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कबीर और नागार्जुन की जयंती से जन एकता सांस्कृतिक यात्रा आरम्भ

बेगूसराय. आज ज्येष्ठ पूर्णिमा दिनांक 28/06/2018 को जन संस्कृति मंच की ओर से कबीर और आधुनिक कबीर नागार्जुन की सम्मिलित जयंती मनायी गयी। इस जयंती के अवसर पर जसम ने जन एकता सांस्कृतिक यात्रा का आयोजन किया, जो वर्तमान व्यवस्था में पल रहे फासीवादी तत्त्व के खिलाफ जन-जागृति का अभियान था। जन एकता सांस्कृतिक यात्रा की शुरुआत बेगूसराय से हुई, जहां नागार्जुन जी की छोटी बेटी मंजू देवी तथा दामाद अग्निशेखर जी ने झंडी दिखाकर जत्था को विदा किया। इस प्रथम जत्थे का नेतृत्व जसम के राज्य उपाध्यक्ष दीपक सिन्हा…

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