समलैंगिक और ट्रांस जेंडर लोगों के सम्मान और बराबरी के अधिकार पर हमला है सेक्शन 377

1917 के रूसी क्रांति के बाद रूस की क्रांतिकारी सरकार ने समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर किया. भारत में समलैंगिकता को अपराध बनाने वाले तो अंग्रेज़ ही थे. अंग्रेज़ चले गए पर अपना कानून छोड़ गए, जिसे भेदभावपूर्ण लोग ‘भारत की संस्कृति ‘ कहते हैं !

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माँ तुझे सलाम !

(माँ केवल ममता का ही खज़ाना नहीं है बल्कि समझदारी का भी स्रोत होती है.  समाज के बारे में, नैतिकता, यौनिकता, सही और गलत के विवेक के बारे में हमें एक नयी दृष्टि देने का भी निमित्त हो सकती है. आइये  ‘मदर्स डे’ के उपलक्ष्य में माँ की रूढ़ हो चुकी छवि से इतर कविता कृष्णन के इस लेख के माध्यम से माँ की एक नयी छवि से परिचित होते हैं, उस पर बात और बहस करते हैं) ‘टू किल अ मॉकिंगबर्ड’ उपन्यास 1950 के दशक के अमेरिका के दक्षिणी…

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