कर्नाटक : लोकतंत्र को कैद

भारत में चुनाव अब नाटक-नौटंकी की तरह हो गये हैं जहां हार-जीत का फैसला जीवन के वास्तविक मुद्दों से नहीं बल्कि मैनेजमेंट, मनी और ध्रुवीकरण के सहारे होता है. मतदाताओं को या तो सम्मोहित के लिया जाता है या फिर उन्हें रोबोट मतदाता बनने को मजबूर कर दिया जाता है. कर्नाटक का नाटक तो चल ही रहा है भविष्य में होने वाले ऐसे कई और नाटकों के लिये तैयार रहिये

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