हेमन्त कुमार की कहानी ‘ रज्जब अली ’ में सामंती वैभव देखना प्रतिक्रियावाद को मजबूत करना है

कहानी में मूल समस्या साम्प्रदायिकता है. यह कहानी हमारे समय के लिहाज से एक बेहद जरूरी कहानी है. इसलिए जरूरी यह है कि इस कहानी के मूल मन्तव्य पर बात हो. कहानी के मूल मन्तव्य पर बात न करके हम उन्ही प्रतिक्रियावादी साम्प्रदायिक ताकतों के हाथ मजबूत करते दिखेंगे.

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पठनीयता का संबंध वास्तविकता से होता है

(प्रेमचंद की परंपरा को नये संदर्भ और आयाम देने वाले हिंदी भाषा के कहानीकारों में अमरकांत अव्वल हैं। अमरकांत से शोध के सिलसिले में सन् 2002 की शरद में मिलना हुआ।अमरकांत के प्रस्तुत बात-विचार उसी मुलाकात और वार्तालाप से निकले हैं-दुर्गा सिंह ।) प्रेमचंद की परंपरा- प्रेमचंद ने ग्रामीण जीवन से विषय उठाया है। शहरी जीवन पर भी लिखा लेकिन मुख्य जोर ग्रामीण जीवन और समाज पर रहा। ग्रामीण जीवन से उन्होंने जो पात्र उठाए उसमें भी दबे-कुचले, शोषित, गरीब पर केंद्रित हैं। इन पात्रों के जरिये प्रेमचंद ने सामाजिक…

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