वीरेनियत-3: अंत:करण के आयतन को विस्तारित करती कविताओं की शाम

वीरेन डंगवाल स्मृति में आयोजित जसम का सालाना कार्यक्रम  बीते 28 सितंबर को आयोजित यह वीरेनियत नाम से तीसरा जलसा था। जन संस्कृति मंच की ओर से इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित इस आयोजन में गुलमोहर हॉल खचाखच भरा था। नए से लेकर पुराने कवि और कविता प्रेमी दोस्तों की यह महफ़िल युवा और वरिष्ठ कवियों को सुनने के लिए जमी हुई थी। लगभग ढाई घंटे चले इस कार्यक्रम में हिंदी कविता का विराट पैनोरमा दिखा, जो मौजूदा सांस्कृतिक हालात और सत्ता संरचना की गहरी आलोचना साझा करने वाला था।…

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प्रेमचंद किसान जीवन की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार धरम, महाजन और साहूकार की भूमिका की शिनाख्त करते हैं

31 जुलाई 2018 को प्रेमचंद जयंती के अवसर पर शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय , बैकुंठपुर(छत्तीसगढ़) में ‘प्रेमचंद और हमारा समय’ विषयक संगोष्ठी आयोजित की गई | इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए डॉ. पीयूष कुमार ने कहा कि किसानों की जिस स्थिति को प्रेमचंद ने आज से बहुत साल पहले अपने कथा साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्त किया था, वह आज भी बदली नहीं है बल्कि और ज्यादा भयावह हुई है | उदारीकरण ने लूट का जो तंत्र खड़ा किया है उसने अनंत जीवटता वाले किसानों…

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राजेन्द्र कुमार : जैसा मैंने उन्हें देखा

उनका अलंकरण मुश्किल है. उनके बारे में अतिशयोक्ति संभव नहीं. ध्यान से देखें तो उन्होंने अपने जीवन और अपनी रचना में कुछ भी अतिरिक्त, कुछ भी surplus बचाकर रखा नहीं है. जो कुछ भी अर्जित रहा, वह इतने इतने रूपों में बंटता रहा कि कोई चाह कर भी उसका लेखा-जोखा नहीं तैयार कर सकता. सामाजिक सक्रियताओं, लेखकीय प्रतिबद्धताओं, अध्यापकीय और पारिवारिक जिम्मेदारियों के दरम्यान उनका सारा अर्जन मानों खुशबू की तरह बिखर गया है.

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जसम ने प्रो रूपरेखा वर्मा के साथ एकजुटता की अपील की

लखनऊ, 7 जुलाई. जन संस्कृति मंच ने अवाम के लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व उपकुलपति प्रो रूपरेखा वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज  करने का आदेश की कड़ी निंदा की है और लोकतांत्रिक संगठनों, नागरिक समाज, अभिभावकों, बौद्धिकों व नागरिकों से इस घटना का विरोध करने और प्रो रूपरेखा वर्मा के साथ एकजुटता की अपील की है. जन संस्कृति मंच, उत्तर प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष कौशल किशोर जारी बयान में कहा है कि लखनऊ विवि की पूर्व उपकुलपति प्रो रूपरेखा वर्मा को प्रदेश सरकार द्वारा…

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जसम ने ‘ नया ज्ञानोदय ‘ को बंद करने और कर्मचारियों की छंटनी का विरोध किया

जन संस्कृति मंच ने ‘ नया ज्ञानोदय ‘ को बंद करने और वहां कार्य कर रहे  कर्मचारियों की छंटनी का विरोध किया है. जन संस्कृति मंच द्वारा आज जारी बयान में कहा गया है कि भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका ‘ नया ज्ञानोदय ‘ के बंद होने की सूचना मिल रही है. जैसा की हम जानते है कि एक न्यास होने के नाते ‘भारतीय ज्ञानपीठ ‘ एवं ‘ ज्ञानपीठ ट्रस्ट ‘ को अनेक प्रकार के छूट, लाभ और आर्थिक मदद सरकार से मिलती रही है. साथ ही , ज्ञानपीठ…

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महेश्वर स्मृति आयोजन में युवा कवि अदनान कफ़ील दरवेश और विहाग वैभव का काव्य पाठ

महेश्वर चाहते थे कि कवि-लेखकों और जनता के बीच कम से कम दूरी हो: आलोक धन्वा महेश्वर की लड़ाई को आगे बढ़ाने की जरूरत है: संतोष सहर पटना, 24 जून . ‘‘महेश्वर चाहते थे कि कवि-लेखकों और जनता के बीच कम से कम दूरी हो, क्योंकि जनता ही रचना का अनंत स्रोत होती है। वह जनता जो मेहनत करती है, ईमान की रोटी खाती है। खून और कत्लोगारत में डूबो देने की नृशंसता से संघर्ष करते हुए वही जीवन को बचाती है।’’ आज बीआईए सभागार में दो दिवसीय महेश्वर स्मृति…

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‘कुच्ची का कानून’ के मंचन के साथ ‘कोरस’ का ‘आज़ाद वतन-आज़ाद जुबाँ’ नाट्योत्सव प्रारंभ

आसिफ़ा की याद में ‘कोरस’ नाट्य समूह द्वारा ‘आज़ाद वतन-आज़ाद जुबाँ’ नाट्योत्सव की शुरुआत आज से महिलाओं का सवाल सिर्फ़ महिलाओं का नहीं, वरन पुरुषों का भी है, पूरे समाज का: प्रो. डेजी नारायण अभिव्यक्ति की आज़ादी पर ख़तरे के दौर में हम, अंग्रेजों के समय से ही चला जा रहा है  ड्रेमेटिक परफ़ारमेंस ऐक्ट : परवेज़ अख़्तर आज शाम छः बजे से पटना के कालिदास रंगालय में ‘कोरस’ नाट्यसमूह द्वारा आयोजित ‘आज़ाद वतन-आज़ाद जुबाँ’ नाट्योत्सव की शुरुआत हुई। इस नाट्योत्सव में बम्बई की टीम ‘आरम्भ मुम्बई प्रोडक्शन’ अपना नाटक ‘बंदिश’, बेगूसराय से ‘द फ़ैक्ट रंगमंडल’ अपना नाटक ‘गबरघिचोर’ और पटना…

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उदय प्रकाश और उनके परिवार को पूर्ण सुरक्षा मिले, आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो-जसम

जन संस्कृति मंच ने मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के सीतापुर गांव में खनन माफिया द्वारा हिंदी के शीर्षस्थ कथाकार, कवि उदयप्रकाश और उनके परिवार को दी जा रही धमकियों की कड़ी निंदा करते हुए उदय प्रकाश और उनके परिवार को सुरक्षा देने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है. जन संस्कृति मंच के महासचिव मनोज कुमार सिंह द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि स्थानीय पुलिस द्वारा आरोपियों के ख़िलाफ़ कदम न उठाया जाना दुख और चिंता की बात है. खनन माफिया के साथ स्थानीय…

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पटना म्यूजियम के निदेशक और मशहूर चित्रकार यूसुफ खान पर हमले की भर्त्सना

पटना, 30 मई. जन संस्कृति मंच, बिहार ने नवनिर्मित पटना म्यूजियम के निदेशक और समकालीन भारतीय कला के प्रमुख चित्रकार यूसुफ खान के साथ मारपीट की घटना की कठोर शब्दों में भर्त्सना की है. जन संस्कृति मंच के राज्य सचिव सुधीर सुमन, जसम पटना के संयोजक राजेश कमल और जसम राष्ट्रीय पार्षद चित्रकार राकेश दिवाकर ने कहा है कि आर्ट काॅलेज में घटी आपराधिक घटनाओं के बाद अब नवनिर्मित पटना म्यूजियम के निदेशक, जो कि एक मशहूर चित्रकार भी हैं, पर संस्थान के ही एक अधिकारी द्वारा हमला किया जाना यह जाहिर…

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दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को क्या स्वतंत्र चेतना से डर लगने लगा है

यह मसला सिर्फ एक व्यक्ति के अपमान का नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को क्या स्वतंत्र चेतना से इतना डर लगने लगा है कि वह विचार विमर्श के मंच पर भिन्न मत का सामना करने से बचना चाहता है? क्या वह अनैतिक और असभ्य तरीकों से स्वतंत्र अभिव्यक्ति को नियंत्रित करने वाले देशों की सूची में अपना नाम लिखवाने की राह पर चल पड़ा है ? यह एक ऐसा सवाल है जिससे प्रत्येक लोकतांत्रिक भारतीय को चिंतित होना चाहिए, उसकी राजनीतिक विचारधारा जो भी हो।

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जन संस्कृति मंच ने दैनिक जागरण के ‘ बिहार संवादी ’ आयोजन के बहिष्कार की अपील की

पटना. कठुआ गैंगरेप और नृशंस हत्या के बारे में फर्जी खबर छापने के विरोध में जन संस्कृति मंच ने साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों से दैनिक जागरण द्वारा आयोजित ‘बिहार संवादी’ नामक आयोजन के बहिष्कार की अपील की है. जन संस्कृति मंच, पटना के संयोजक राजेश कमल ने बयान जरी कर कहा कि  कठुआ गैंगरेप और नृशंस हत्या तथा हत्यारों के पक्ष में शर्मनाक राजनीतिक तरफदारी का जब पूरे देश और दुनिया में विरोध हो रहा है, तब दैनिक जागरण द्वारा प्रमुखता से यह फर्जी खबर छापना कि ‘कठुआ मे बच्ची के साथ…

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युवा मूर्तिकार कृष्णा कुमार पासवान : प्रगतिशील वैचारिक प्रतिबद्धता और प्रभावशाली सम्प्रेषणीयता

  हमारे देश में मूर्तिकला की बहुत ही समृद्ध परंपरा रही है. शास्त्रीय स्तर की बात करें या लोक शैली की या फिर आधुनिक कला या समकालीन कला जगत की, मूर्तिकारों की अनथक मेहनत और रचनात्मकता हमें बहुत प्रभावित करती है. यद्यपि मूर्तिकला की सीमा यह है कि उसका स्वरूप मूल रूप से स्थूल होता है. मानवीय मष्तिष्क की जटिलता बढ़ने के साथ कला की रचनात्मक जटिलता का विस्तार बहुत स्वभाविक है जिसमें मूर्तिकला का स्थूल स्वरुप आड़े आता है. दक्ष मूर्तिकार निरंतर अभ्यास, प्रयोगधर्मिता और प्रतिबद्धता के बदौलत, सृजनात्मक…

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‘आदमी के उठे हुए हाथों की तरह’ हिन्दुस्तानी अवाम के संघर्षों को थामे रहेगी केदारनाथ सिंह की कविता : जसम

कवि केदारनाथ सिंह को जन संस्कृति मंच की श्रद्धांजलि जनतांत्रिक मूल्यों की अकाल-वेला में केदारनाथ सिंह की कविता जनप्रतिरोध के सारसों की अप्रत्याशित आवाज़ थी. उनका संग्रह ‘अकाल में सारस’ 1988 में प्रकाशित हुआ था, जिसमें इसी शीर्षक की एक कविता है. कविता इस तरह शुरू होती है- “तीन बजे दिन में आ गए वे जब वे आए किसी ने सोचा तक नहीं था कि ऐसे भी आ सकते हैं सारस एक के बाद एक वे झुंड के झुंड धीरे-धीरे आए धीरे-धीरे वे छा गए सारे आसमान में धीरे-धीरे उनके…

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