भारतीय चित्रकला और ‘कथा ‘ : 2

हमने देखा की जिस समाज में दृश्य को ‘पढ़ना’ सिखाया जाता हो वहाँ कथाओं का ‘चित्रण’ ही हो सकता है, कला का सृजन नहीं। चित्रकार विन्सेंट वॉन गॉग (1853 -1890) आसमान पर अलग से दमकते सात तारों को महज तारों के रूप में देख कर उनकी सुंदरता से मुग्ध होने वाले कलाकार थे। उनका बनाया हुआ विश्वप्रसिद्ध चित्र ‘रोन नदी के ऊपर तारों भरी रात’ (Starry night over the river Rhone :1888) को देख कर हम सहज ही समझ सकते हैं कि एक चित्रकार के लिए प्रकृति को ‘पढ़ना’ और उसे ‘देखने’ में क्या अंतर होता है।

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भारतीय चित्रकला में स्त्री को उपेक्षित रखा गया है- अशोक भौमिक

पटना: 13 अगस्त 2018. ‘‘भारतीय चित्रकला में ज्यादातर पुरुषों और पितृसत्तात्मक समाज को महिमामंडित करने का कार्य ही किया गया है। स्त्रियों को दोयम दर्जे का स्थान दिया गया है और उन्हें पुरुषों पर आश्रित दिखाया गया है।’’ ये बातें प्रख्यात चित्रकार अशोक भौमिक ने जन संस्कृति मंच द्वारा स्थानीय छज्जूबाग में आयोजित व्याख्यान ‘भारतीय चित्रकला में स्त्री’ में कही। यह कार्यक्रम बिहार और पूरे देश में स्त्रियों के साथ हो रही यौन-हिंसा की नृशंस घटनाओं के खिलाफ आयोजित था। अशोक भौमिक ने व्याख्यान-प्रदर्शन के दौरान यह बताया कि प्राचीन…

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