मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी : सर्वोच्‍च न्‍यायालय की निगरानी में एस.आई.टी. द्वारा जांच ही उचित

यह संतोषजनक है कि पुणे पुलिस द्वारा बिना जांच किये ही आरोप लगा कर जेल भेजने की सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने अनुमति नहीं दी और उन्‍हें हाउस अरेस्‍ट में ही रखा, लेकिन बेहतर होता कि सर्वोच्‍च न्‍यायालय की निगरानी में एस.आई.टी. द्वारा जांच करवाई जाती क्‍योंकि पुणे पुलिस की गतिविधियों में खुद ही कई गैरकानूनी काम हुए हैं, जिन्‍हें कि इस मामले में जस्टिस चन्‍द्रचूड़ ने असहमति वाले अल्‍पमत के निर्णय में चिन्हित किया है.

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इस राजनीतिक लड़ाई में मैं हर कीमत चुकाने को तैयार हूं : गौतम नवलखा

गिरफ्तारी के बाद प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा का संदेश यह समूचा केस इस कायर और प्रतिशोधी सरकार द्वारा राजनीतिक असहमति के खिलाफ़ की गई राजनीतिक साजिश है जो भीमा कोरेगांव के असली दोषियों को बचाने के लिए जी जान लगा रही है और इस तरह से उसने अपने उन घोटालों और नाकामियों की ओर से ध्‍यान बंटाने का काम किया है, जो कश्‍मीर से लेकर केरल तक फैली हुई हैं। एक राजनीतिक मुकदमे को राजनीतिक तरीके से ही लड़ा जाना चाहिए और मैं इस अवसर का स्‍वागत करता हूं।…

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