जीवनपुर हाट जंक्शन : कहानी की शक्ल में संस्मरण और संस्मरण की शक्ल में कहानी

दो सितम्बर को नोएडा में प्रसिद्ध चित्रकार अशोक भौमिक के स्मृति संग्रह ‘ जीवनपुर हाट जंक्शन ’ पर घरेलू गोष्ठी में एक परिचर्चा आयोजित की गयी. यह पुस्तक सत्तर के दशक में एक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के तौर पर अशोक भौमिक के जीवनानुभवों की रचनात्मक अभिव्यक्ति है. यह कहानी की शक्ल में संस्मरण और संस्मरण की शक्ल में कहानी संग्रह है.

इस परिचर्चा की शुरुआत करते हुए कहानीकार योगेन्द्र आहूजा ने अपने आधार आलेख के माध्यम से अपना विचार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि ये कहानियाँ इस वक्त कहानी की अपेक्षा को पूरा करने वाली हैं. शोध छात्र मिथिलेश ने क्रमशः सात कहानियों पर अपने विचार व्यक्त किये और कहा कि ये कहानियाँ बेचैन करने वाली हैं.

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अनुपम सिंह की कविताओं पर जसम की घरेलू गोष्ठी की रपट

अनुपम की कविताएँ अपने वक्त, अपने समाज और अपनी काया के अनुभव से उपजी हुई कविताएँ हैं- योगेंद्र आहूजा पिछली 23 जून 2018 को जसम की घरेलू गोष्ठी के तहत प्रसिद्ध चित्रकार अशोक भौमिक के घर पर युवा कवयित्री अनुपम सिंह की कविताओं का पाठ और उस पर परिचर्चा आयोजित हुई। कायर्क्रम की शरुआत अनुपम सिंह द्वारा उनके काव्य पाठ से हुई। उन्होंने काव्यपाठ की शुरुआत ‘तलैया’ से की इसके बाद ‘मूढ़ महिलाएं’ , ‘अधिकारहीन बुआएं’ , ‘लड़कियाँ जवान हो रही हैं’, ‘जुए की पारियां’, ‘रंग जहाँ अपराधी होते हैं’,…

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