एक समाज के रूप में कहाँ पहुँच गए हैं हम ?

इस घटना में पहले दिन से जैसे आरोपियों को भीड़ के हवाले करने की मांग की गयी,वह चिंताजनक संकेत हैं. कल्पना करके देखिये कि पहले दिन जो लोग संदिग्ध बताए गए,यदि वे भीड़ के हाथ पड़ गए होते तो क्या होता ? निश्चित ही वे भीड़ द्वारा बेहद भयानक तरीके से मार डाले गए होते. भीड़ उन्हें मारती और मारने वालों में वह व्यक्ति भी शामिल होता, जिसे अब हत्यारा बताया जा रहा है. क्या यह न्याय होता ? वही न्याय,जिसके नाम पर भीड़,पुलिस द्वारा पकड़े गए लोगों को अपने हाथों सौंपने की मांग कर रही थी ?

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