फासीवाद के खिलाफ मजबूत वाम एकता आज की जरूरत : दीपंकर भट्टाचार्य

“ त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में जनतंत्र की हत्या बंद करो ” नारे के साथ 24 जुलाई को दिल्ली के संसद मार्ग पर पांच प्रमुख वामपंथी पार्टियों का संयुक्त धरना हुआ. धरने में दिल्ली व आस-पास के क्षेत्रों के वामपंथी कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया.

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फासीवाद के खिलाफ संघर्ष में मार्क्स के विचार से बेहतर विचार नहीं- दीपंकर भट्टाचार्य

क्रोनी पूंजीवाद, सांप्रदायिक विभाजन और मनुवादी के बीच गठजोड़ है. लिचिंग स्थाई परिघटना बना दी गई है. लिचिंग करने वालों को पता है कि उन्हें सत्ता का संरक्षण मिला है. यह फासीवाद राज्य नही तो क्या है. ऐसे राज्य या तानाशाही के खिलाफ संघर्ष में मार्क्स के विचार से बेहतर विचार नहीं.

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फासीवाद का परीक्षण पूरे सवाब पर है

“अभी पूरी दुनिया में क्या चल रहा है इसे समझने के लिए हमें दो चीजों पर गौर करने की जरूरत है। पहला यह है कि हम परीक्षण के दौर में हैं। दूसरा यह है कि जो चल रहा है वह फासीवाद है – एक ऐसा शब्द जिसे सचमुच बहुत सावधानी से इस्तेमाल करने की जरूरत है, लेकिन जब यह क्षितिज पर इतना साफ दिखाई दे रहा है तो इसका प्रयोग करने से परहेज भी नहीं होना चाहिए. ” फासीवाद के बाद ” के वक्त को भूल जाइए – हम जिस समय में जी रहे हैं वह पूर्व-फासीवाद का दौर है.

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हिटलर और फ़ासीवाद का नया उभार

सोवियत संघ के पतन और विश्व अर्थतंत्र में आए बदलावों के चलते तेजी से उभरी नवफ़ासीवादी सक्रियता फिलहाल अंतर्राष्ट्रीय राजनीति की सबसे खतरनाक प्रवृत्ति बन गई है. मार्टिन ए ली की किताब ‘ द बीस्ट रीअवेकेन्स: फ़ासिज्म’स रीसर्जेन्स फ़्राम हिटलर’स स्पाइमास्टर्स टु टुडे’ज नीओ-नाज़ी ग्रुप्स ऐंड राइट-विंग एक्सट्रीमिस्ट्स ’ में इसी बात को समझने की कोशिश की गई है कि पचास साल पहले जो फ़ासीवाद पूरी तरह बदनाम था वह फिर से किस तरह मजबूत बना.

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