‘ मोदी सरकार ने हर मोर्चे पर किसानों और देश की जनता से धोखा किया है ’

  सोनीपत (हरियाणा).  अखिल भारतीय किसान महासभा की राष्ट्रीय परिषद की दो दिवसीय बैठक आज हरियाणा के सोनीपत स्थित सर छोटूराम धर्मशाला में शुरू हुई। बैठक की अध्यक्षता संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कामरेड रुलदू सिंह ने की। बैठक की शुरुआत करते हुए किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव कामरेड राजाराम सिंह ने कहा कि मोदी राज में रफाल महा घोटाला और सीबीआई तख्ता पलट की घटनाओं ने साबित कर दिया है कि यह सरकार कानून और संविधान के प्रावधानों का खुला उल्लंघन कर रही है। इस सरकार के रहते देश का…

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किसान के क्रमिक दरिद्रीकरण की शोक गाथा है ‘ गोदान ‘

प्रेमचंद ने गोदान में उपनिवेशवादी नीतियों से बरबाद होते भारतीय किसानी जीवन और इसके लिए जिम्मेदार ताकतों की जो पहचान आज के 75 साल पहले की थी वह आज भी हमें इसीलिए आकर्षित करती है कि हालत में फ़र्क नहीं आया है बल्कि किसान का दरिद्रीकरण तेज ही हुआ है और मिलों की जगह आज उसे लूटने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ आ गई हैं. यहाँ तक कि जातिगत भेदभाव भी घटने की बजाय बढ़ा ही है. उसे बरकरार रखने में असर रसूख वाले लोगों ने नए नए तरीके ईजाद कर लिए हैं.

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मोदी सरकार की नई एमएसपी किसानों के साथ खुला धोखा

नई एमएसपी का गहराई से मूल्यांकन करें तो यह लगभग 15 प्रतिशत की औसत बढोतरी बैठती है. अगर आप मुद्रा स्फीति की बढ़ती दर से इसकी तुलना करें तो हर साल लगभग 4 प्रतिशत की दर से मुद्रास्फीति बढ़ती है. इसका मतलब यह हुआ कि मोदी जी के चार साल के कार्यकाल में ही मुद्रास्फीति की दर जो 16 प्रतिशत बढी उसे ही नई एमएसपी में चालाकी से समायोजित कर दिया गया है.

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विभाजकारी राजनीति के खिलाफ एकताबद्ध आंदोलन की राह पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का किसान

भारतीय किसान यूनियन के बिखराव के बाद अपने-अपने स्तर पर सक्रिय किसान यूनियन के इन ग्रुपों के बीच किसानों की संगठित ताकत को फिर बटोरने पर सहमति बनी है. सभी कार्यकर्ता किसानों के मुद्दे पर संयुक्त रूप से लड़ने और किसानों की एकता को तोड़ने की विभाजनकारी राजनीति को परास्त करने का संकल्प लेते दिखे. यह आज के भारत के किसान आंदोलन के लिए एक अच्छी सीख हो सकती है.

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अवध का किसान विद्रोह : किसानों और मेहनतकशों की स्थिति को समझने के लिए एक जरूरी किताब

डॉ चन्द्र भूषण अंकुर भारत एक कृषि प्रधान देश है, यह बात विद्यार्थियों को 20वीं शताब्दी तक प्राथमिक कक्षाओं में रटा दी जाती थी किन्तु किसानों के इस देश में, कभी भी किसान नेतृत्कारी भूमिका में नहीं रहा। आजादी की लड़ाई के दौरान, किसानों ने कई बार ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी, अपने हितों का बलिदान कर आजादी के संघर्ष को तेज किया, बावजूद इसके प्रायः कांग्रेस पार्टी, जो भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन की नेतृत्वकारी पार्टी थी, ने भी उनके संघर्षों को उतना ही महत्व दिया, जितना पार्टी के लिए जरूरी…

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भोजपुर : कर्ज़ बोझ के दबाव में बटाईदार किसान दशरथ बिंद ने की आत्महत्या – भाकपा-माले

बटाईदार किसानों को फसल क्षति का मुआवजा दे सरकार-भाकपा माले मनोज मंजिल पटना, 8 अप्रैल.भोजपुर के बड़हरा प्रखंड के सिन्हा ओपी के घाघर मिल्की गांव में बटाईदार किसान दशरथ बिंद ने 8 अप्रैल को आत्महत्या कर ली. वह कर्ज के बोझ से दबे हुए थे और ओलावृष्टि के कारण उन्हें  खेती में काफी नुकसान हुआ था. भाकपा-माले की जांच टीम ने 8 अप्रैल को घटनास्थल का दौरा किया. जांच टीम में भाकपा-माले की केंद्रीय कमिटी के सदस्य मनोज मंजिल, राजू यादव, तरारी से भाकपा-माले विधायक सुदामा प्रसाद, बड़हरा के प्रखंड…

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