किसान के क्रमिक दरिद्रीकरण की शोक गाथा है ‘ गोदान ‘

प्रेमचंद ने गोदान में उपनिवेशवादी नीतियों से बरबाद होते भारतीय किसानी जीवन और इसके लिए जिम्मेदार ताकतों की जो पहचान आज के 75 साल पहले की थी वह आज भी हमें इसीलिए आकर्षित करती है कि हालत में फ़र्क नहीं आया है बल्कि किसान का दरिद्रीकरण तेज ही हुआ है और मिलों की जगह आज उसे लूटने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ आ गई हैं. यहाँ तक कि जातिगत भेदभाव भी घटने की बजाय बढ़ा ही है. उसे बरकरार रखने में असर रसूख वाले लोगों ने नए नए तरीके ईजाद कर लिए हैं.

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भोजपुर : कर्ज़ बोझ के दबाव में बटाईदार किसान दशरथ बिंद ने की आत्महत्या – भाकपा-माले

बटाईदार किसानों को फसल क्षति का मुआवजा दे सरकार-भाकपा माले मनोज मंजिल पटना, 8 अप्रैल.भोजपुर के बड़हरा प्रखंड के सिन्हा ओपी के घाघर मिल्की गांव में बटाईदार किसान दशरथ बिंद ने 8 अप्रैल को आत्महत्या कर ली. वह कर्ज के बोझ से दबे हुए थे और ओलावृष्टि के कारण उन्हें  खेती में काफी नुकसान हुआ था. भाकपा-माले की जांच टीम ने 8 अप्रैल को घटनास्थल का दौरा किया. जांच टीम में भाकपा-माले की केंद्रीय कमिटी के सदस्य मनोज मंजिल, राजू यादव, तरारी से भाकपा-माले विधायक सुदामा प्रसाद, बड़हरा के प्रखंड…

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