महिलाओं, दलितों, अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों के खिलाफ महिला संगठनों ने धरना दिया

लखनऊ. “ डरें……. कि आप उ.प्र. में हैं ” के बैनर के साथ 23 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश की चरमराती कानून व्यवस्था एवं उसके चलते महिलाओं, बच्चियों, दलितों, अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों के खिलाफ एडवा, भारतीय महिला फेडरेशन, एपवा व हमसफर संस्था के संयुक्त तत्वावधान में गाँधी मूर्ति जी.पी.ओ. पर महिलाओं ने धरना दिया. धरने के समर्थन में शहर के कई सामाजिक संगठन, जनसंगठन एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की. यह धरना उ.प्र. में पिछले कुछ समय से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हो रही हिंसा की वीभत्स घटनाओं…

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गुजराती दलित साहित्य : बजरंग बिहारी तिवारी

गुजराती दलित साहित्य की नींव मजबूत है. उसकी उपलब्धियां गौरवपूर्ण हैं. उसका वर्तमान समृद्ध प्रतीत होता है. लेकिन, अपने भविष्य को लेकर उसे ज्यादा सावधान होना पड़ेगा. नई पीढ़ी के बहुत कम रचनाकार उसकी ओर उन्मुख हो रहे हैं. दलित स्त्रियाँ तो अत्यल्प हैं ! अभी यहाँ के संगठनों की आंदोलनधर्मिता शिथिल है. हिंदूवादी ताकतों से उनकी टकराहट समाप्तप्राय लगती है. उना कांड (जुलाई, 2016) से उभरे सवालों पर जिस तीव्रता, तैयारी और गंभीरता से रचनाकारों के बीच मंथन होना था वह अभी प्रतीक्षित है. फासीवादी हिंदुत्व से टक्कर लेने वाले नए नेतृत्व के प्रति एक हिचक है जो दूर नहीं हो रही.

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मो. आरिफ की कहानी ‘ लू ’ : दलितों की अपमानजनक स्थितियों और उनकी जिजीविषा को दर्शाने वाली कहानी

मो. आरिफ ने अपने लेखन के शुरूआती दौर में अंग्रेज़ी में एक उपन्यास लिखा था. बाद में उन्होंने हिन्दी में कहानियाँ लिखना शुरू किया. उनकी कहानियों ने हिन्दी जगत में उन्हें ख़ासी पहचान दिलाई. उनकी कहानी ‘ लू ’ ने सबसे पहले हिन्दी के पाठकों का ध्यान आकृष्ट किया. यह कहानी अपनी कथादृष्टि की परिपक्वता और अंतर्वस्तु की स्पष्टता के लिए जानी जाती है. ‘ लू ’ सवर्ण मानसिकता की क्रूर और जड़ अहम्मन्यता की पोल खोलती है. यह कहानी इंस्पेक्टर चौहान और जोगी पासवान की है. कहानी इन दोनों चरित्रों के…

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दलितों का भारत बंद : दलित आन्दोलन का नया दौर और नया रूप

  पिछले चार सालों में भारत में दलित आन्दोलन नए रूप में विकसित होना प्रारम्भ कर चुका है.रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या,गुजरात का ऊना आन्दोलन,सहारनपुर में भीम आर्मी का आन्दोलन,महाराष्ट्र के भीमा कोरे गांव का संघर्ष और 2 अप्रैल का दलितों द्वारा किया गया स्वत:स्फूर्त भारत बंद,इन सभी आंदोलनों ने यह साबित किया है कि भारत में दलित आन्दोलन अब नए दौर में प्रवेश कर चुका है. आज के समय में दलित आन्दोलन ज्यादा व्यापक मुद्दों,विस्तृत नजरिये और उग्र तेवर के साथ सामने आया है. लोकतंत्र पर बढ़ते फासीवादी हमले और…

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महिलाओं की संगठित ताकत ने बंद करा दी शराब की दुकान

बनारस शहर के चुरामनपुर गाँव की दलित बस्ती की महिलाएं और स्कूली छात्राएं पिछले एक साल से बस्ती के अंदर शराब की दुकान खुलने से परेशान थीं . कानूनी तौर पर एक गाँव में अंग्रेजी और देशी शराब की एक-एक दुकान का ही प्रावधान है लेकिन लोहता थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस गाँव में कानून व्यवस्था का खुले आम उल्लंघन किया गया और प्रशासन भी आँख पर पट्टी बाँध कर बैठा रहा. गाँव की महिलाओं को हर रोज शराबियों द्वारा यौन शोषण का शिकार होना पड़ता था. यहाँ…

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