एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश का परिणाम है मोहम्मद अज़ीम की हत्या

दिल्ली के मालवीय नगर में मोहम्मद अज़ीम की हत्या पर सीपीआईएमएल, सीपीएम, आइसा, एडवा की तथ्यान्वेषी रपट नई दिल्ली. 25 अक्टूबर को मालवीय नगर के 8 साल के एक बच्चे मोहम्मद अज़ीम  की हत्या बच्चों के ही एक समूह ने पीट-पीटकर कर दी. मोहम्मद अज़ीम मालवीय नगर इलाके के लिए जामिया फरीदया मदरसा में पढ़ाई कर रहा था. बेहद गरीब पृष्ठभूमि के उन 70 बच्चों में से वह एक था जो उस मदरसे में पढ़ते थे. मोहम्मद अज़ीम की हत्या की खबर सत्तारूढ़ भाजपा और आरएसएस द्वारा चलाई जा रही मुस्लिम -विरोधी…

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मोदी शासन देश के लिए एक हादसा साबित हुआ है : दीपंकर

कोडरमा के ब्लॉक मैदान , तिलैया में भाकपा माले ने 8 अक्टूबर को बड़ी रैली कर “ मोदी–भाजपा हटाओ , देश बचाओ ” की हुंकार भरी. रैली को भाकपा माले के महासचिव कामरेड दीपंकर भट्टाचार्य, चर्चित युवा दलित नेता जिग्नेश मेवानी, झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के विधायक जगरनाथ महतो सहित भाकपा, माकपा के वरिष्ठ नेताओं ने संबोधित किया.

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आधार पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय : आने वाला इतिहास असहमति वाले अल्‍पमत निर्णय को ही सही ठहरायेगा

सर्वोच्‍च न्‍यायालय का निर्णय लाखों लोगों को मायूस करने वाला है, क्‍योंकि देश के गरीबों को पीडीएस एवं मनरेगा जैसी जनकल्‍याण की योजनाओं से वंचित करने के लिए आधार का इस्‍तेमाल करने की वैधता प्रदान कर दी गई है. सर्वोच्‍च न्‍यायालय इस इस तथ्‍य को महसूस करने में असफल रहा है कि भोजन या रोजगार का हक़ ऐसे अधिकार हैं जिनसे किसी को भी, किसी भी आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता है. बड़े पैमाने पर मौजूद इस तथ्‍य को भी पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है कि आधार में एनरोलमेण्‍ट कराने को बाद भी 27 प्रतिशत गरीबों को जनकल्‍याण योजनाओं का लाभ नहीं दिया जा रहा है.

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शहीदे आज़म भगत सिंह के जन्मदिन पर हल्द्वानी में भाकपा माले की इंकलाब रैली

भाकपा(माले) ने 28 सितंबर को शहीदे आज़म भगत सिंह के जन्मदिवस पर “इंकलाब रैली” का आयोजन किया। इस रैली में हेतु माले के मजदूर, किसान व महिला संगठनों के सदस्य सैकड़ों की संख्या में अब्दुल्ला बिल्डिंग के समक्ष एकत्रित हुए और वहाँ से लाल झंडों से सुसज्जित रैली ने नारेबाजी करते हुए बुद्ध पार्क की ओर मार्च किया।

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भाकपा-माले की पटना के गांधी मैदान में ऐतिहासिक रैली, भाजपा को उखाड़ फेंकने का आह्वान

माले महासचिव ने कहा कि मोदी का साढ़े चार साल तबाही का काल है. मोदी ने कहा था कि बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार, लेकिन मोदी के राज में महंगाई आसमान छू रही है. पेट्रोल व डीजल के दाम ने पुराने सारे रिकार्ड ध्वस्त कर दिए हैं. राफेल विमानों की खरीद में अबतक का सबसे बड़ा घोटाला हुआ है. कर्ज में डूबे अनिल अंबानी को मोदी ने राफेल खरीद का ठेका दे दिया, जो जनता के साथ विश्वासघात है. आश्चर्य है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के सवाल पर मोदी संसद में नहीं बोल सकते हैं, लेकिन अमित शाह तथा अंबानी-अडानी के साथ बैठक कर बातचीत कर सकते हैं. मोदी राज में किसानों और गरीबों को कर्ज नहीं मिल रहा है लेकिन बड़े-बड़े पूंजीपतियों को लगातार छूटें मिल रही हैं. पूंजीपति हजारों करोड़ रुपये लेकर भाग रहे हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी नरेन्द्र मोदी के ही रास्ते चल रहे हैं.

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असली नक्सलियों के बीच

भाकपा माले खुद को आज भी बदल रही है . इसी महीने 5 सितम्बर को गौरी लंकेश की बरखी पर पार्टी महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य और मैंने एक सम्मेलन को सम्बोधित किया था . बाद में उसी रोज फासिज्म के खिलाफ सड़क पर एक नुक्क्ड़ सभा को भी सम्बोधित किया था . मैंने यही महसूस किया , दीपांकर लकीर के फ़क़ीर बनना नहीं चाहते . उनकी पार्टी एक नए वैचारिक आयाम में प्रवेश करना चाहती है . या उसके लिए पंख फड़फड़ा रही है . माले ने मार्क्सवाद को फुले ,आंबेडकर के विचारों और भगत सिंह के सपनों से मंडित करने की पहल की है . 1990 के दशक में ही इस पार्टी ने ब्राह्मणवाद विरोध को अपनी कार्य सूची में शामिल किया था . आज वह इस पर जोर दे रहे हैं .

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एससी-एसटी कानून का विरोध करने वाले संविधान की जगह मनुस्मृति लाना चाहते हैं : माले

लखनऊ. भाकपा (माले) ने कहा है कि एससी-एसटी कानून का विरोध करने वाले देश में संविधान की जगह मनुस्मृति लाना चाहते हैं। पार्टी ने इस कानून के खिलाफ भारत बंद का आह्वान करने वाली ताकतों के पीछे संघ-भाजपा का हाथ होने का आरोप लगाया और कहा कि यह दलित-विरोधी, लोकतंत्र-विरोधी मानसिकता का परिचायक है। पार्टी ने गुरुवार को कहा कि बंद पूरी तरह फ्लाप रहा।  देशव्यापी प्रतिवाद के दबाव में राजग की केंद्र सरकार भले ही उक्त कानून को उसके पुराने स्वरूप में पुनर्बहाली के लिए बाध्य हुई, लेकिन ब्राह्मणवाद…

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घोषित हो या अघोषित, भारत पूरी तरह मोदी आपातकाल के दौर से गुजर रहा : दीपंकर भट्टाचार्य

भाकपा-माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा है कि घोषित हो या नहीं, भारत आज पूरी तरह मोदी आपातकाल के दौर से गुजर रहा है, और इसका इलाज उसी तरह किया जाना चाहिए जैसा कि लोगों ने 1977 में इंदिरा आपातकाल का किया था. उन्होंने कहा कि उमर खालिद पर हमले का प्रयास, दाभोलकर, पंसारे, कलबुर्गी और गौरी लंकेश की हत्या, स्वामी अग्निवेश पर बार-बार हमले और मानवाधिकार प्रचारकों का निरंतर उत्पीड़न लोकतंत्र को एक फासीवादी शासन के अधीन करने की एक ही रणनीति का हिस्सा हैं. आज जब आम लोगों के लिए लड़ने वाले वकीलों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और लेखकों पर हमले हो रहे हैं और और उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है, तो लोगों को उनके पक्ष में खड़े रहना होगा और बिना शर्त उनकी रिहाई के लिए आवाज उठानी होगी. लोकसभा चुनाव की पूर्व संध्या पर ऐसी कार्रवाई शासकों के हताशा को ही दिखाती है. आने वाले चुनावों में वे अपनी निर्णायक हार भी देख रहे हैं.

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मुजफ्फरपुर बालिका गृह बलात्कार कांड के खिलाफ वाम दलों का 2 अगस्त को बिहार बंद

मुजफ्फरपुर बालिका गृह बलात्कार कांड, दलितों पर बढ़ते हमले और गरीबों को उजाड़ने के खिलाफ वामदलों ने संयुक्त रूप से 2 अगस्त को बिहार बंद का आह्वान किया है.

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फासीवाद के खिलाफ संघर्ष में मार्क्स के विचार से बेहतर विचार नहीं- दीपंकर भट्टाचार्य

क्रोनी पूंजीवाद, सांप्रदायिक विभाजन और मनुवादी के बीच गठजोड़ है. लिचिंग स्थाई परिघटना बना दी गई है. लिचिंग करने वालों को पता है कि उन्हें सत्ता का संरक्षण मिला है. यह फासीवाद राज्य नही तो क्या है. ऐसे राज्य या तानाशाही के खिलाफ संघर्ष में मार्क्स के विचार से बेहतर विचार नहीं.

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सारण के स्कूल में छात्रा के साथ सात महीने से गैंग रेप

सारण जिले के एकमा थाने क्षेत्र के परसागढ़ स्थित एक प्राइवेट स्कूल में 10 वीं क्लास की एक छात्रा के साथ सात महीने से लगातार गैंग रेप की घटना सामने आई है. बलात्कारियों में स्कूल का प्रिंसिपल, कुछ शिक्षक व छात्रों सहित 18 लोग शामिल हैं. एपवा और भाकपा माले ने 10 जुलाई को सारण जिलाधिकारी के समक्ष प्रदर्शन करने का ऐलान किया है.

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वाराणसी में भाकपा माले की पूर्वांचल स्तरीय जवाब दो रैली 20 को

मोदी-योगी सरकार द्वारा “अच्छे दिन ” लाने का वादा धोखा साबित हुआ. गरीब-दलित-किसान-नौजवान-महिलायें सभी लोग ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. न दो करोड़ रोजगार मिला न किसानों की आय दोगुनी हुई, न काला धन ही वापस आया. वाराणसी में भाकपा माले की 20 जून की जवाब दो रैली में ये सवाल मजबूती से उठाये जायेंगे.

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