नफरत की विचारधारा और बढ़ती असहिष्णुता

हिन्दू राष्ट्रवादी ब्रिगेड अब इस भगवाधारी स्वामी को निशाना बना रही है. उन पर हमला, उसी श्रृंखला का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत डॉ दाभोलकर की हत्या से हुई थी. उसके बाद कामरेड गोविन्द पंसारे मारे गए, फिर डॉ कलबुर्गी और उनके बाद गौरी लंकेश. समाज में जैसे-जैसे असहिष्णुता बढ़ रही है, वैसे-वैसे असहमति के लिए स्थान कम होता जा रहा है. जो भी व्यक्ति शासकों की सोच से इत्तेफाक नहीं रखते, उन्हें चुन-चुन कर निशाना बनाया जा रहा है. चूंकि हमलावरों को पता है कि शासक दल के नेता न केवल उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होने देगें बल्कि वे उनकी प्रशंसा करेंगे इसलिए ऐसे लोगों की हिम्मत बढ़ रही है.

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भीड़ हमला-हत्या की घटनाएँ निर्देशित घटनाएँ हैं

इन निर्देशित गिरोहों को बाकायदे हत्या की मशीन में तब्दील किया जा रहा है. गौरी लंकेश के हत्यारे का बयान इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिसमें वह कहता है कि उसे पता भी नहीं था कि जिसकी हत्या करने वह जा रहा है वो आदमी है कौन, सिवाय इसके कि उसे जिसकी हत्या करनी है वह हिन्दू-विरोधी है. स्वामी अग्निवेश पर हमला करने वाले भी यही कह रहे थे कि ये हिंदू-विरोधी हैं.

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