भारतीय चित्रकला में ‘कथा’ : 3

वह ‘कथा’ जिसे हम किसी चित्र में चित्रित पाते है , वास्तव में उस कथा से हमारा परिचय चित्र के माध्यम से नहीं बल्कि साहित्य (लिखित या वाचिक) के माध्यम से होता है , चित्र में हम केवल उस व्याख्या के अनुरूप उपस्थितियों को पहचान ही पाते हैं। किसी महापुरुष या देवता की कथा का चित्र में ‘चित्रण’ को हम इसलिए महान मान लेते हैं, क्योंकि हम उस चित्र में उस महापुरुष को उसके रंग , वेशभूषा , अलंकार , मुकुट और उनकी क्रियाओं / ‘लीलाओं’ से पहचान लेते हैं । महज चित्र में किसी परिचित कथा या नायक को किसी स्थापित कथा के अनुरूप पहचान लेना लेना, कभी भी चित्र देखने का तरीका नहीं हो सकता।

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अमृता शेरगिल की ‘ तीन लड़कियाँ ’

  ( तस्वीरनामा की छठी कड़ी में भारतीय चित्रकला के मुहावरे को बदल देने वाली विश्व प्रसिद्ध चित्रकार अमृता शेरगिल के चित्र  ‘ तीन लड़कियाँ ‘ के बारे में बता रहे हैं प्रसिद्ध चित्रकार अशोक भौमिक)   बीसवीं सदी की भारतीय चित्रकला की धारा, जिसका विकास बंगाल में 1900 के बाद से आरम्भ हुआ था; देवी देवताओं की लीला कथाओं के चित्रण से भरा हुआ था.  बंगाल के कलाकारों ने अजंता से लेकर मुग़ल कला के अनुसरण में ही ‘भारतीयता’ की खोज करने की कोशिश की और इस लिए विषय…

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चित्तप्रसाद और बच्चें : जिन फरिश्तों की कोई परिकथा नहीं

  ( तस्वीरनामा की दूसरी कड़ी में पूरी जिंदगी जनता के सुख-दुःख, जय-पराजय और श्रम-संघर्ष को अपने चित्रों से चित्रित करने वाले चित्रकार चित्तप्रसाद द्वारा बाल श्रमिकों पर बनाये गए चित्र श्रृंखला ‘ जिन फरिश्तों की कोईं परिकथा नहीं ‘ से हमें परिचित करा रहे हैं प्रसिद्ध चित्रकार अशोक भौमिक )   चित्तप्रसाद (1915 -1978) एक ऐसे विरल चित्रकार थे जो पूरी जिंदगी जनता के सुख-दुःख, जय-पराजय और श्रम-संघर्ष को अपने चित्र में चित्रित करते रहे. बंगाल के महा अकाल के समय (1943), उनके मार्मिक चित्रों ने पूरे देश को अकाल…

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एक महान चित्र जो दूसरे विश्वयुद्ध की बमबारी में नष्ट हो गया

( तस्वीरनामा की पहली कड़ी में उन्नीसवीं सदी के यथार्थवादी चित्रकला धारा के अग्रणी चित्रकार ज्याँ गुस्ताव कोरबे (1819-1877)  के चित्र ‘ पत्थर तोड़ने वाले ‘ के बारे में बता रहे हैं प्रसिद्ध चित्रकार अशोक भौमिक )   गुस्ताव कोरबे का चित्र  ‘ पत्थर तोड़ने वाले ‘ को गौर से देखने से हमें मेहनतकश श्रमिकों की दुर्दशा के प्रति , चित्रकार की सहानुभूति स्पष्ट दिखाई देती है. चित्र में  पत्थर तोड़ते हुए दो श्रमिकों को हम देख सकते हैं जो पत्थर तोड़ कर,  उसे वहाँ से हटा कर एक सड़क…

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