वैज्ञानिक दृष्टि और आलोचनात्मक यथार्थ वाले विचार संपन्न कवि थे विष्णु खरे: आलोक धन्वा

विष्णु खरे जनता के आक्रोश के संगठित होने की कामना करने वाले कवि हैं। उनकी कविताएं जनसाधारण के जीवन के दृश्यचित्रों की तरह हैं। वर्णनात्मकता और संवेदना के साथ उनकी कविताएं विचार और तर्क के गहन सिलसिले की वजह से महत्वपूर्ण हैं। उनकी कविताएं हमारे संस्कारों और रूढ़ विचारों को बदलने की क्षमता रखती हैं।

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महेश्वर स्मृति आयोजन में युवा कवि अदनान कफ़ील दरवेश और विहाग वैभव का काव्य पाठ

महेश्वर चाहते थे कि कवि-लेखकों और जनता के बीच कम से कम दूरी हो: आलोक धन्वा महेश्वर की लड़ाई को आगे बढ़ाने की जरूरत है: संतोष सहर पटना, 24 जून . ‘‘महेश्वर चाहते थे कि कवि-लेखकों और जनता के बीच कम से कम दूरी हो, क्योंकि जनता ही रचना का अनंत स्रोत होती है। वह जनता जो मेहनत करती है, ईमान की रोटी खाती है। खून और कत्लोगारत में डूबो देने की नृशंसता से संघर्ष करते हुए वही जीवन को बचाती है।’’ आज बीआईए सभागार में दो दिवसीय महेश्वर स्मृति…

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