इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव नतीजों के बाद व्यापक हिंसा और आगजनी

5 अक्टूबर, शुक्रवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ का चुनाव हुआ। सात बजे से ही समर्थक और छात्र कला संकाय के लाइब्रेरी गेट पर जमे थे। शनिवार को करीब 1 बजे इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव का परिणाम आ गया। परिणाम आते ही बम चलने लगे, नारे लगने लगे थे। इस चुनाव में एबीवीपी को फिर मुँह की खानी पड़ी। धनबल, बाहुबल के साथ मंत्री-विधायक के प्रचार के बाद भी एबीवीपी एक सीट से ज्यादा नहीं जीत पाई। दो सीट, अध्यक्ष और उपमंत्री पर समाजवादी छात्रसभा ने भारी मतों से जीत दर्ज…

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रोजगार आंदोलन से जुड़े छात्र इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में आइसा प्रत्याशी का करेंगे समर्थन

इलाहाबाद. इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में रोजगार आंदोलन से जुड़े छात्र-छात्राएँ आइसा प्रत्याशियों का समर्थन करेंगे. ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी -शैलेश पासवान, महामंत्री- नीलम सरोज, उपमंत्री -सोनू यादव के समर्थन में कार्यालय पर आयोजित हुई प्रेस वार्ता में यह घोषणा की गई. प्रेस वार्ता में आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुचेता डे , जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष गीता कुमारी, एसएससी आंदोलन के नेता सुनील यादव व शशांक सिंह, यूपीएसएसएससी के नेता विवेक वर्मा, यूपीएससी- यूपीपीएससी के प्रतियोगी छात्र अजय वर्मा, यूपी पुलिस आंदोलन के…

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के लिए आइसा ने घोषित किया अपना पैनल

इलाहाबाद. इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2018 के लिए ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने सदस्यों की आम सभा बुलाकर अपने प्रत्याशियों की घोषणा की। अध्यक्ष पद के लिए शैलेश कुमार पासवान (एमए अंग्रेजी), उपाध्यक्ष के लिए शिवा पाण्डेय (एम म्यूजिक), महामंत्री के लिए नीलम सरोज (मॉस कॉम) व उपमंत्री पद के लिए सोनू यादव (एमए अंग्रेजी) को प्रत्याशी घोषित किया गया। आइसा प्रदेश सचिव सुनील मौर्य ने कहा कि भाजपा को केंद्र सरकार में आए हुए चार साल से ज्यादा हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने इलाहाबाद की…

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प्रेमचंद ने राष्ट्रवाद की अवधारणा के फासीवादी चरित्र को काफी पहले ही देख लिया था : प्रो. रविभूषण

प्रेमचंद ने आज से काफी पहले ही आवारा पूंजी के ग्लोबल चरित्र और उसके साम्राज्यवादी गठजोड़ की शिनाख्त कर ली थी . उन्होंने राष्ट्रवाद की अवधारणा के फासीवादी चरित्र को काफी पहले ही देख लिया था.

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राजेन्द्र कुमार : जैसा मैंने उन्हें देखा

उनका अलंकरण मुश्किल है. उनके बारे में अतिशयोक्ति संभव नहीं. ध्यान से देखें तो उन्होंने अपने जीवन और अपनी रचना में कुछ भी अतिरिक्त, कुछ भी surplus बचाकर रखा नहीं है. जो कुछ भी अर्जित रहा, वह इतने इतने रूपों में बंटता रहा कि कोई चाह कर भी उसका लेखा-जोखा नहीं तैयार कर सकता. सामाजिक सक्रियताओं, लेखकीय प्रतिबद्धताओं, अध्यापकीय और पारिवारिक जिम्मेदारियों के दरम्यान उनका सारा अर्जन मानों खुशबू की तरह बिखर गया है.

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्यापकों की नियुक्ति के लिए हुई स्क्रीनिंग में अपारदर्शिता व भेदभाव के खिलाफ़ प्रदर्शन

आइसा ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में अध्यापकों की नियुक्ति के लिए हुई स्क्रीनिंग कमेटी में अपारदर्शिता व भेदभाव के खिलाफ आज प्रदर्शन किया और कुलपति को ज्ञापन सौंपा.

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