समकालीन जनमत

Tag : मैं 1857 बोल रहा हूं

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‘क्रान्तिरथी’ और ‘मैं 1857 बोल रहा हूं’ के रचनाकार कवि बी एन गौड़ नहीं रहे

  लखनऊ, 3 जनवरी। ‘हर शोषण के उत्पीड़न के/हो विरुद्ध जो क्रान्ति वो सुन्दर है/धरती जब ज्वालामुखी बनती/तब जानो कि ज्वाला भी अन्दर है/इस भाँति...
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