पटना में प्रेमचंद जयंती पर हिरावल ने ‘निर्वासन’ का मंचन किया

पटना.कथा सम्राट प्रेमचंद जयंती के अवसर पर आज स्थानीय छज्जूबाग में हिरावल के कलाकारों ने प्रेमचंद की कहानी ‘निर्वासन’ का नाट्य प्रदर्शन किया। साथ ही, फिरकापरस्ती के विरुद्ध रचनाओं का गायन किया. इस अवसर पर हिरावल की ओर से ‘निर्वासन’ के आधार पर निर्मित फिल्म को भी जारी किया गया.  नाटक और फिल्म में काम करनेवाले कलाकार प्रीति प्रभा और राम कुमार हैं. महिलाओं पर बढ़ रही हिंसा और सांप्रदायिक फासीवादी माहौल के खिलाफ आयोजित इस कार्यक्रम के मौके पर उपस्थित दर्शकों को संबोधित करते हुए लेखक संतोष सहर ने…

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महेश्वर स्मृति आयोजन में युवा कवि अदनान कफ़ील दरवेश और विहाग वैभव का काव्य पाठ

महेश्वर चाहते थे कि कवि-लेखकों और जनता के बीच कम से कम दूरी हो: आलोक धन्वा महेश्वर की लड़ाई को आगे बढ़ाने की जरूरत है: संतोष सहर पटना, 24 जून . ‘‘महेश्वर चाहते थे कि कवि-लेखकों और जनता के बीच कम से कम दूरी हो, क्योंकि जनता ही रचना का अनंत स्रोत होती है। वह जनता जो मेहनत करती है, ईमान की रोटी खाती है। खून और कत्लोगारत में डूबो देने की नृशंसता से संघर्ष करते हुए वही जीवन को बचाती है।’’ आज बीआईए सभागार में दो दिवसीय महेश्वर स्मृति…

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पटना में दिखाई गई फ्रेंच मानवविज्ञानी निकोलस जाउल की दलित संघर्ष पर केंद्रित फिल्म ‘संघर्ष ’

  पटना में दो दिवसीय ‘समय का गीत और प्रतिरोध का सिनेमा’ आयोजन दलित उत्पीड़न और सरकार के जनविरोधी कार्रवाइयों के प्रतिरोध में गीत गाये  पटना. पटना में 16-17 मार्च को ‘‘समय का गीत और प्रतिरोध का सिनेमा’ आयोजन हुआ। हिरावल और प्रतिरोध का सिनेमा द्वारा आयोजित इस आयोजन की शुरुआत छज्जूबाग, पटना में गीत-संगीत की वीडियो-आॅडियो सीडी ‘समय का गीत’ के लोकार्पण से हुई. लोकार्पण फ्रेंच मानवविज्ञानी निकोलस जाउल और जसम के राज्य सचिव सुधीर सुमन ने किया. संतोष सहर, कवि कृष्ण समिद्ध, जसम पटना के संयोजक कवि राजेश…

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यह कैसा फागुन आया है !

( मुजफ्फरपुर के धरमपुर गांव में भाजपा नेता द्वारा बोलेरो गाड़ी से कुचलकर 9 बच्चों को मार डालने की घटना पर कवि एवं संस्कृतिकर्मी संतोष सहर की मार्मिक कविता.  इस कविता को ‘ हिरावल ’ के नाट्यकर्मी संतोष झा की आवाज में आप यहाँ सुन भी सकते हैं )   यह कैसा फागुन आया है ! (बिहार में भाजपा नेता की गाड़ी से कुचलकर मार डाले गए बच्चों के लिए ) हंसते-खेलते ही तो गये थे घर से! हालत हुई ऐसी, किसकी नजर से! देखो आये गोपी भइया तुझे खिलाने…

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कविता शब्दों की इंजीनियरिंग है: प्रो. तरुण कुमार

गोरख पांडेय स्मृति आयोजन के दूसरे दिन प्रो. संतोष कुमार के कविता संग्रह ‘ढिबरी’ का लोकार्पण और बातचीत पटना, 29 जनवरी. हिरावल द्वारा आयोजित दो दिवसीय गोरख पांडेय स्मृति आयोजन के दूूसरे दिन 29 जनवरी को प्रो. संतोष कुमार के कविता संग्रह ‘ढिबरी’ का लोकार्पण और बातचीत हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत संतोष झा, राजन, प्रीति प्रभा और प्रमोद यादव ने गोरख के दो गीतों ‘माया महाठगिनी हम जानीं’ और ‘बीतता अंधरिया के जमनवा’ गाकर की। उसके बाद गोरख पांडेय की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। संचालन हिरावल के सचिव…

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गोरख के गीतों के साथ देश-दुनिया और समाज को बेहतर बनाया जा सकता है: अरुण कमल

क्रांतिकारी जनकवि गोरख पांडेय की स्मृति में हिरावल ने किया आयोजन गोरख के हिंदी-भोजपुरी के जनगीतों और गजलों का गायन हुआ पटना: 28 जनवरी. ‘ गोरख के गीतों के साथ हम देश-दुनिया और समाज को बेहतर बना सकते हैं। वे कबीर और नागार्जुन की परंपरा के एक बड़े कवि हैं। उन्होंने लोकगीतों का संस्कार लेकर भोजपुरी और ख्रड़ी बोली में गीत लिखे। उनकी कविताएं मजदूर-किसानों, उत्पीड़ित-वंचित और शोषित-अपमानित जनता के हक में लिखी गई हैं। वे आंदोलनों के पोस्टरों पर नजर आती हैं, वे नारों का रूप ले चुकी हैं।…

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