‘ स्वायत्तता’ का आगमन अर्थात अकादमिक संस्थानों को दुकान में तब्दील करने की तैयारी

(दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर  उमा राग का यह लेख  ‘  द वायर ’ में  29 मार्च को प्रकाशित हुआ  है )   हम से छीन लिया गया कॉपी कलम किताब कैद कर लिया गया हमारे सपने को फिर हम से कहा गया तुम स्वायत्त हो हमारे अधिकारों को छीनने के लिए उन्होंने एक नया शब्द गढ़ा है ‘स्वायत्तता’ जैसे उन्होंने कभी अंगूठा काटने को कहा था ‘ गुरु दक्षिणा ‘ –प्रदीप कुमार सिंह कितनी सच है यह पंक्ति कि हमारे अधिकारों को छीनने के लिए ही अक्सर सत्ता नए-नए…

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