एक समाज के रूप में कहाँ पहुँच गए हैं हम ?

इस घटना में पहले दिन से जैसे आरोपियों को भीड़ के हवाले करने की मांग की गयी,वह चिंताजनक संकेत हैं. कल्पना करके देखिये कि पहले दिन जो लोग संदिग्ध बताए गए,यदि वे भीड़ के हाथ पड़ गए होते तो क्या होता ? निश्चित ही वे भीड़ द्वारा बेहद भयानक तरीके से मार डाले गए होते. भीड़ उन्हें मारती और मारने वालों में वह व्यक्ति भी शामिल होता, जिसे अब हत्यारा बताया जा रहा है. क्या यह न्याय होता ? वही न्याय,जिसके नाम पर भीड़,पुलिस द्वारा पकड़े गए लोगों को अपने हाथों सौंपने की मांग कर रही थी ?

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एक अंतहीन प्यास और तलाश की कथा विमलेश त्रिपाठी का उपन्यास ‘हमन हैं इश्क मस्ताना’

अनिला राखेचा हिंदी युग्म द्वारा प्रकाशित विमलेश त्रिपाठी  का ताज़ा-तरीन उपन्यास “हमन हैं इश्क मस्ताना” जितना अद्भुत है उतना ही बेजोड़ है इसका शीर्षक। उपन्यास का यह शीर्षक संत कवि कबीर दास जी के दोहे से लिया गया है- “हमन इश्क है मस्ताना हमन को होशियारी क्या… रहें आजाद या जग से हमन दुनिया से यारी क्या!” अर्थात, हम तो इश्क की मस्ती में हैं हमसे होशियारी क्या करते हो। हम संसार में रहें या संसार से दूर  इसमें लिप्त नहीं होते। यह कथन पूरी तरह उपन्यास के शीर्षक की सार्थकता…

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फारवर्ड प्रेस के हिंदी संपादक को मिल रही जान से मारने की धमकी

फारवर्ड प्रेस हिंदी-संपादक नवल किशोर कुमार को फोन और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर जान से मार डालने की घमकियां मिल रही हैं. धमकी देने वाले लोग स्वयं को बिहार में रणवीर सेना के संस्थापक ब्रह्मेश्वर मुखिया का समर्थक बता रहे हैं. इस संबंध में दिल्ली के पुलिस कमिश्नर, साइबर सेल और बिहार के डीजीपी से शिकायत की गई है.

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